करीब 14 साल पहले विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सपा सांसद आजम खान पर वाल्मीकि समाज, एससी वर्ग के खिलाफ आपत्तिजनक जातिसूचक शब्दों का प्रयोग के आरोप में टांडा थाने में दर्ज हुए मुकदमे के मामले में कोर्ट में आरोप तय हो गए हैं।
मामला साल 2007 का है। विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए आजम खान के टांडा में जनसभा करने के बाद बसपा नेता धीरज कुमार शील ने टांडा थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि आजम खां ने जनसभा को संबोधित करते हुए वाल्मीकि समाज के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमान किया था। इससे विभिन्न वर्गों के लोगों में शत्रुता को बढ़ावा दिया और लोगों के बीच दुश्मनी या नफरत पैदा करने, धर्म, जाति और भाषा के आधार पर बांटने का प्रयास किया। तहरीर के बाद पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
अब यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है। शनिवार को कोर्ट में इस मामले में तारीख थी। शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले में आजम खान के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में अगली तारीख 11 नवंबर तय की गई है, जिसमें गवाही की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।