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देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक है बैंकों का नर0जीकरण

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रामपुर/शाहबाद/बिलासपुर/स्वार। सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान बैंक कर्मचारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में धरना दिया। कर्मचारियों का कहना था कि बैंकों का निजीकरण देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक है। सरकार बड़े कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए निजीकरण करना चाहती है।
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जिलेभर के बैंक कर्मचारी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले सिविल लाइंस स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में एकत्र हुए। इसके बाद बैंक के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन करना शुरूकर दिया। यूनियन के संयोजक एमके चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार औद्योगिक घरानों के दबाव में लाभप्रद बैंकों का निजीकरण कर रही है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि बैंकों का निजीकरण करने के बजाय उन्हें मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए।
सह संयोजक जगमोहन अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक घरानों ने बैंकों के करोड़ों रुपये हड़प लिए हैं। ऐसे में वे रुपये वापस दिलाए जाएं। स्टेट बैंक के अनूप बिड़ला ने कहा कि सरकार के स्तर पर बैंकों का एनपीए कम करने का प्रयास किया जाए। इस मौके पर विमल कपूर, धनराज, ओपी यादव, जीत नारायण सिंह, राजेश कन्नौजिया, काजल, ज्योति, आशुतोष गुप्ता, भीम सिंह रावत, प्रमोद कुमार, मोहित त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे। शाहबाद में निजीकरण को लेकर तमाम बैंक कर्मियों में विरोध जताते हुए दूसरे दिन को बैंक बंद रहीं। शुक्रवार को शाहाबाद कस्बे और क्षेत्रभर की पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, प्रथमा ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक समेत क्षेत्र की तमाम बैंक बंद रहीं। हड़ताल के चलते क्षेत्र के कारोबारियों को लेनदेन करने में बड़ी समस्या उत्पन्न हुई। बैंकों की हड़ताल के चलते लेनदेन प्रभावित होने से कारोबारियों को नुकसान हुआ है। हड़ताल के दौरान विजय सिंह, राजीव भारती, सोमेश कुमार और अजय कुमार समेत तमाम बैंक प्रबंधक भी हड़ताल पर थे।बिलासपुर नगर में नैनीताल हाईवे स्थित स्थानीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर सभी बैंक अधिकारी व कर्मचारी एकत्र हुए। सभी ने सरकार की निजीकरण की नीति के खिलाफ नारेबाजी की। यूनियन के शाखा सचिव अनिल पाल ने बताया कि सरकारी बैंक ही जनता के बैंक हैं। छोटी छोटी बचतों को एकत्र करके ये बैंक देश के विकास में लगाते हैं, इनको निजी पूँजीपतियों को सौंपना बहुत घातक कदम है। बैंक अधिकारी संघ के अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने कहा कि सरकार को अपनी निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि, यह जनता के कमजोर वर्ग के हित में नहीं है। बीमा कर्मचारी संघ के मण्डल अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने कहा कि सरकारी बैंकों के जरिये ही सरकार अपनी जनहित की तमाम योजनाएं लागू करती है। निजी बैंक सिर्फ मुनाफे के लिए ही काम करते हैं। सरकार की नीति के कारण आज देश भर में हजारों ग्रामीण शाखायें बंद हो चुकी हैं। सरकार जनता की बचतों के साथ खेलना बंद करें, अन्यथा बैंक बीमा कर्मचारी मिलकर जनता के सामने इन जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में वीरेंद्र पटेल, कपिल गंगवार, युधिष्ठिर कुमार, नेपाल सिंह, अरविंद कुमार, एल आई सी के शाखा सचिव दीवान सिंह बिष्ट, नैब सिंह, रवि कुमार, विनय आदि मुख्य थे ।
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स्वार में राष्ट्रीयकृत बैंकों की दूसरे दिन भी हड़ताल रही। शाखाओं पर ताले लटके देख ग्राहकों को मायूसी छा गई। उधर, नगर के अधिकतर एटीएम भी ग्राहकों को धोखा दे गए।
निजीकरण के विरोध में देश के समस्त राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी व कर्मचारियों ने हड़ताल कर रखी है। शुक्रवार को हड़ताल का दूसरा दिन रहा। किसान, कारोबारी और आम आदमी पर हड़ताल का असर पड़ा है। लेनदेन प्रभावित होने से कारोबार की दशा प्रभावित हुई है। उधर, आम ग्राहकों को एटीएम भी धोखा दे गए। किसी में कैश नहीं था, तो कोई तकनीकी कारणों से बंद मिला।
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