सरकारी कालेज के छात्र-छात्राएं सालभर बिना प्रैक्टिकल के ही विज्ञान की पढ़ाई ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि पास भी हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि सरकारी कालेज की लैब में कहीं शिक्षकों का टोटा बना हुआ है तो कहीं उपकरण ही नहीं है। ऐसे में विज्ञान के विद्यार्थियों के पढ़ाई का कोई मतलब ही नहीं रह गया है।
माध्यमिक शिक्षक परिषद की ओर से संचालित करने वाले राजकीय कालेज में पढ़ाई का बुरा हाल है। रामपुर के सरकारी कालेजों पर नजर दौड़ाई जाए तो यहां की स्थिति तो और भी ज्यादा खराब है। जिले में कुल 34 इंटर कालेज हैं। नौ कालेज को कुछ साल पहले दसवीं से 12वीं कक्षा के संचालन का दर्जा दे दिया गया।
इसके बाद भी यहां सुविधाएं नहीं दी गई हैं, जिसकी वजह से दिक्कत हो रही है। यहां सरकारी कालेज की लैब में कहीं विज्ञान शिक्षक नहीं हैं तो कहीं लैब में उपकरणों की कमी बनी हुई है। इन कालेज की लैब का बुरा हाल है। ऐसे में प्रैक्टिकल के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही हैं, जिसकी वजह से छात्र छात्राओं को दिक्कत हो रही है।
इस मुद्दे को लेकर प्रधानाचार्य भी कम परेशान नहीं हैं। उन्होंने भी कई दफा अफसरों को लिखा, मगर लैब की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।