रामपुर। नौ साल पहले पूर्व प्रधान की हत्या के मुकदमे में अदालत ने एक दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दूसरे दोषी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि वह घटना के वक्त नाबालिग था। इस मामले में सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी।
12 जुलाई 2011 को थाना अजीमनगर क्षेत्र के हरैटा गांव में हत्या की घटना हुई थी। गांव में प्रधान और पूर्व प्रधान पक्ष के बीच राशन वितरण को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि विवाद को लेकर पूर्व प्रधान जमीर अहमद की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने मृतक के बेटे जावेद की ओर से अफसर अली, उनके बेटों फिरासत अली, इस्लाम, रेहान, इल्यास और शहादत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। अभियोजन ने मुकदमे में 10 गवाह पेश किए। गवाहों के बयान के आधार पर सभी को कड़ी सजा देने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्रीराम अग्रवाल और सचिन अग्रवाल ने पैरवी की। उनका कहना था कि चुनाव की रंजिश में सभी को झूठा फंसाया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 23 अक्तूबर को मुकदमे में इस्लाम और रेहान को हत्या में दोषी करार दिया था। गुरुवार एजीजे-प्रथम (कोर्ट नंबर तीन) की कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें इस्लाम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बचाव पक्ष की ओर से रेहान के मामले में प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें कहा कि वह घटना के समय नाबालिग था। इस पर अदालत ने उसकी उम्र के संबंध में जांच कराने के आदेश दिए हैं।