भोट। बुढ़ापे की दहलीज पर पहुंचे 72 वर्ष के सफी और 70 वर्ष की आयशा ने समाज की दकियानूसी रस्मों को उठाकर परे रख दिया। अकेलेपन ने घेरा तो दोनों ने एक दूसरे का सहारा बनने का फैसला किया। दोनों ने बच्चों की रजामंदी ली और निकाह कर लिया। खबर फैली तो चर्चाओं का एक बाजार लग गर्म हो गया।
भोट थाना क्षेत्र के मुंडिया मनकरा ग्राम पंचायत के नरखेड़ी गांव निवासी सफी अहमद का जन्म वर्ष 1949 को हुआ था। उनकी शादी सद्दीकन से हुई थी। शादी के बाद उन्होंने अपने घर के बाहर ही छोटी सी परचून की दुकान खोल ली थी। उनकी पांच पुत्रियां हुईं थीं। अपनी सभी बेटियों की शादी कर अब वह फारिग हो चुके हैं। करीब 10 वर्ष पूर्व उनकी पत्नी सद्दीकन की बीमारी से मौत हो जाने के बाद वह अकेले रह गए हैं। वहीं, कुछ दिन पूर्व उनकी पुत्रियों ने उनकी परेशानी को देखते हुए दूसरी शादी करने का प्रस्ताव रखा। समाज के बातें बनाने के डर से उन्होंने मना कर दिया। बुढ़ापे में उनकी परेशानियों को देखते हुए पुत्रियों के काफी समझाने के बाद वह मान गए। बीते दो सितंबर को सबकी सहमति से उन्होंने टांडा हुर्रमतनगर गांव निवासी आयशा बी से निकाह कर लिया।
आयशा बी भी बुढ़ापे में रह रही थीं अकेली
निकाह के बाद सफी अहमद के साथ रह रहीं आयशा बी ने बताया कि उनकी शादी भी कई साल पूर्व हुई थी। उनका एक पुत्र तथा पुत्री हैं। दोनों की शादी कर दी है। शादी के बाद उनका पुत्र अपनी पत्नी को लेकर बाहर चला गया, इसके बाद से वह अकेली रह गईं थीं। मिलने जुलने वालों ने निकाह करने का मशवरा दिया। समाज क्या कहेगा के डर से पहले तो मना कर दिया था, लेकिन लोगों के समझाने पर बात समझ में आ गई और निकाह कर लिया।
दुकान चलाकर गुजारा कर रहा दंपती
सफी अहमद और उनकी पत्नी आयशा बी घर के बाहर दुकान चलाकर गुजारा कर रहे हैं। पूर्व ग्राम प्रधान गुड्डू हसन ने बताया कि सफी अहमद ने बुढ़ापे में एक बेसहारा महिला से निकाह कर मिसाल पेश की है। जिंदगी भर मेहनत कर जो भी रकम एकत्र की, उससे अपनी पांच पुत्रियों की शादी कर दी। अब उनके हालात काफी खराब हैं। बुढ़ापे में भी वह घर के बाहर एक छोटी सी परचून की दुकान चलाकर अपना और पत्नी का गुजारा कर रहे हैं। इसलिए, प्रशासन को भी उनकी मदद कर प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे बुढ़ापे में अकेले पड़ चुके लोग इसी तरह एक दूसरे का सहारा बन सकें।