रामपुर। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में रामपुर में हुए बवाल के मामले में बीस से ज्यादा आरोपियों को पुलिस ने नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधित वादों के निस्तारण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा गया है, ताकि सर्वोच्च न्यायालय में 21 से 23 अगस्त के बीच लगने वाली लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर निपटारा किया जा सकें।
शहर में 21 दिसंबर 2019 को बवाल हुआ हुआ था। सीएए और एनआरसी के विरोध में शाहबाद गेट पर जलसे का आयोजन किया गया था। इसके लिए भीड़ सड़कों पर आ गई थी। भीड़ ने कई जगह हिंसक प्रदर्शन किया था। हाथीखाना चौराहे पर पुलिस से मारपीट और पथराव किया था। छह बाइकें और पुलिस की एक जीप भी फूंक दी थी। इस दौरान गोली चलने से एक युवक की मौत हो गई थी। पुलिस पर भीड़ ने पेट्रोल बम तक फेंके थे। पुलिस ने इस मामले में गंज और शहर कोतवाली में हजारों लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए थे। पुलिस ने 195 लोगों को चिन्हित किया था। इन पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए इनसे इस दौरान हुए नुकसान की भरपाई किए जाने की बात कही गई थी। इसके लिए शासन की ओर से मेरठ में ट्रिब्यूनल भी गठित किया था। यहां न्यायाधिकरण मेरठ ने रामपुर के 195 लोगों को दोषी मानते हुए इनसे 11,08,901 रुपये वसूली का आदेश दिया था। इस तरह प्रत्येक दोषी को 5,687 रुपये बतौर अर्थदंड जमा करने हैं। इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट चला गया और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जहां पर सुप्रीम कोर्ट ने वसूली पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट लोक अदालत के जरिए मामलों का निस्तारण कराना चाहती है।
एएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में 21, 22 और 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत लगेगी। वहां आपसी सहमति से वादों का निस्तारण होगा। इसके लिए आरोपियों को नोटिस भेजकर सुप्रीम कोर्ट में जाकर लोक अदालत में मामला निपटाने को कहा है।