मंगलवार का दिन पब्लिक के लिए भारी रहा। बैंकों पर ताले लटके हुए थे और एटीएम भी चालू नही थे। खाली हो चुकी जेबों को भरने के लिए लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक लोग दौड़ लगा रहे थे, लेकिन राहत नहीं मिल रही थी।
नोटबंदी के 28 दिन गुजर चुके हैं। मगर, लोगों को राहत नहीं मिल रही है। बैकों पर हर रोज लगने वाली कतार कम होती नहीं दिख रही हैं। घोषणाएं तमाम हो चुकी हैं, लेकिन पब्लिक को कहीं भी राहत नहीं है, जिससे हालात लगातार नाजुक होते जा रहे हैं। मंगलवार को अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस की छुट्टी थी। बैंकों में ताले ताले लटके हुए थे तो एटीएम भी चालू नहीं थे।
जरूरत भर का खर्चा चलाने के लिए कैश की जरूरत पड़ रही थी,लेकिन कैश हाथ नहीं आ रहा था। सैलरी निकालने के लिए भी लोग कभी इस एटीेएम पर तो कभी दूसरे एटीएम पर दौड़ लगा रहे थे। मगर, किसी भी एटीएम पर कोई कैश नहीं मिल पा रहा था। लोग भटक रहे थे,लेकिन सभी की हालत एक जैसी नजर आ रही थी। कोई एटीएम बंद था तो किसी का शटर खुला हुआ था लेकिन कैश नहीं था। एटीएम में कैश न होने से लोग भटकते हुए नजर आए,जिससे लोगों को खासी दिक्कत आती रही।