हिंद भाईचारा समिति के आल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम के लिए पूरे मुल्क को कौमी एकता का पैगाम दिया। मुल्क में नफरत फैलाने वालों को ललकारा। मौजूदा सियासी माहौल पर अफसोस जताया। साथ ही सियासियों पर कटाक्ष किए। साथ ही सभी मजहब के लोगों को एक माला में पिरोने की कोशिश की।
गांधी समाधि के निकट एक मैरिज हाल में पैगाम-ए- मोहब्ब्त मौजू पर आल इंडिया मुशायरे का आगाज व्यवसायी सुभाष नंदा, तारिक अब्दुल्ला, पालिका के पूर्व चेयरमैन सरदार जावेद खां, व्यापारी नेता शैलेंद्र शर्मा, धनंजय पाठक ने शमा रोशन कर किया। मंजर वाहिदी ने नात पाक का नजराना पेश किया। इसके बाद शायरों को दावते सुखन दी गई। माजिद देवबंदी ने मुल्क में नफरत फैलाने वालों को इस तरह ललकारा: सुना है आप हैं माहिर हवा चलाने में, हुनर न छोड़ेंगे हम भी दीये जलाने में। जौहर कानपुरी ने कलाम के जरिये दुश्मन को सबक सिखाने की सीख दी। कहा- जीने का यह हुनर भी आजमाना चाहिए। भाइयों से जंग हो तो आ जाना चाहिए।
सबीना अदीब ने कलाम पढ़ा- मुझको नजरों से गिरा दीजिए, मर जाउंगी आप पर कत्ल की तोहमत भी नहीं आएगी। जफर सेबाई ने सियासियों पर कटाक्ष किया- माचिस तुम्हारे हाथ में है तुम्ही तय करो, इससे दीये जलाओगे या घर जलाओगे। नश्तर अमरोही ने कलाम पढ़ा- मिली मसनदें जब से यहां कमीनों को, चढाए फिरता है हर कोई आस्तीनों को। अकील नोमानी ने कलाम पढ़ा- बहुत दुश्वार है बचकर निकलना चारा साजो, यह जालिम दूर से बीमार को पहचान लेते हैं। डा. ताहिर कमर ने कलाम पढा- तुम भी खिंचे-खिंचे से थे हम भी बचे-बचे, दोनों ही जिम्मेदार हैं शीशे में बाल के लिए। इनके अलावा चरन सिंह बशर, राजेश रेड्डी, मल्लिकाजादा जावेद, शहजादा गुलरेज, निगहत अमरोही, सैयद रामिश, डा. जहीर रहमती भी थे। मुशायरे की निजामत शकील गौस ने की।