...खूब रोए हम भी जब तक आंखों में पानी रहा
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जिंदगी सचमुच हसीन इत्तेफाक है। अगर इत्तेफाक न हो तो मुहब्बत न हो, शायरी न हो संगीत न हो। शायरों ने अपने कलाम के जरिये इस संदेश को अवाम तक पहुंचाया। शायरों का कहना था कि रामपुर अदब का गहवारा है। शायरी और गंगा-जमुनी तहजीब का मरकज है। बैरियान मुहल्ले में मुशायरे का आगाज आकाशवाणी रामपुर के डायरेक्टर सरवत उस्मानी ने शमा रोशन कर किया।
शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली सैयद दुरवेश अहमद सरवत उर्फ मोती मियां की लिखी किताब कुल्लियत-ए-सरवत का विमोचन किया। सीन शीन आलम ने कलाम पेश किया कि मु्ददतों बस काम अपना मरसिया ख्वानी का रहा, खूब रोए हम भी जब तक आंखों में पानी रहा। डा. जावेद नसीमी ने कलाम पढ़ा कि दिलों के जो ताल्लुक वही तो काम के हैं, के अब यह खून के रिश्ते तो सिर्फ नाम के हैं।
फरीद नोमानी ने कलाम पढ़ा कि न चमकेंगे न इज्जत मिलेगी, उतर आए अगर जमीं पर सितारे। गुफरान फरीदी ने कलाम पढ़ा कि होगा मौसम ये खुशगवार कभी, अब तो दशहत की हर तरफ लू है। इनके अलावा अजहर इनायती, इरफान दानिश, जहीर रहमती, शहजादा गुलरेज, इफ्तखार ताहिर, अतीक जिलानी, तसव्वुर रामपुरी, डा. शरीफ अहमद, अतीक जिलानी ने भी कलाम पेश किया। इस मौके पर नसीर शाह खां, असलम हसन खां, नईम भी थे। मुशायरे की सदारत समी उल्लाह खां और निजामत शकील गौस ने की।