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चमन का हुस्न है होली हमारा प्यार है होली...

Mon, 21 Mar 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर
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चमन का हुस्न है होली हमारा प्यार है होली... - फोटो : amarujala
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पल्लव काव्य मंच की ओर से फाल्गुन उत्सव साहित्यिक परिचर्चा और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। होली के त्योहार को सांप्रदायिक सौहार्द और एकता का पर्व बताया। आगापुर रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित और पुष्प अर्पित कर की गई। होली के रंगों को इफ्तेखार ताहिर ने कुछ यूं बयां किया कि होली आई है होली आई है, होली रंगों का प्यार लाई है।
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जितेंद्र कमल आनंद ने कहा कि रंग खेलो मस्ती में, भर रंगों के संग, रंगो स्वयं भी रंग में, रंगों अंग-प्रत्यंग। उड़े रंग और अबीर भए दृश्य अविराम, कुंज-कुंज केसरिया, रंग रंगो श्याम है, पंक्तियों से शिवकुमार चंदन ने होली के माहौल को प्रस्तुत किया। शृंगार रस में रची होली की कविता प्रस्तुत करते हुए हीरालाल किरण ने कहा कि ऐसा रंग रगूंगा गोरी, याद रहे जीवन भर होरी, मेरे पास तनिक आ जाओ, रंग अबीर गुलाल लगाओ।

डा. अश्फाक जैदी ने कहा कि चमन का हुस्न है होली, हमारा प्यार है होली, हजारों खुशियां साथ में लाती है ये होली। इसके साथ ही आशीष पांडे, ताहिर कमल नोमानी, डा. जहीर अहमद सिद्दकी, डा. रघुवीर शरण शर्मा, सुरेश अधीर, रामकिशोर वर्मा, रामसागर शर्मा, रमेश चंद्र जैन सेठी, सतीश चंद्र शर्मा ने भी काव्य पाठ किया। डा. राजीवकांत त्रिपाठी और डा. किश्वर सुल्ताना ने होली के महत्व और माहौल को बयां किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. रघुवीर शरण शर्मा व संचालन शिवकुमार चंदन ने किया। कार्यक्रम में उदय प्रकाश सक्सेना, रामकुमार सक्सेना, हरिमोहन जौहरी, हेमंत, सुबोध राजन त्रिपाठी, वैष्णोदत्त शर्मा रहे।
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