होली से पहले बाजारों में रौनक छाने लगी है। होली पर सबसे ज्यादा बिक्री मिलावटी मावे से बनी मिठाई की होती है जो त्योहार की मिठास को कम कर देती है। मिलावटखोरों ने बाजार में नकली मावा उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। शहर से लेकर गांवों तक में नकली मावे की मंडी सज गई है। यानि इस होली पर लोग मिलावटी मावे से बने पकवान खाने के लिए तैयार रहें।
हैरत की बात यह है कि हफ्तों पहले से मिलावटी मावे का कारोबार चल रहा है लेकिन पूछे जाने पर अफसर नींद से जागकर अंगड़ाई की मुद्रा अख्तियार कर रहे हैं।मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगोंकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चाहें होली हो या फिर दीवाली और या फिर कोई अन्य त्योहार।
हर त्योहार पर मोटा मुनाफा कमाने के फेर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। यहां मिलावटी मावा बनाया जा रहा है, जिन्हें होली के मौके पर बाजार में उतारने की तैयारी चल रही है। शहर के मिस्टन गंज, बैजनाथ की गली में मावे का बड़ा कारोबार चल रहा है। इसके अलावा शहर की मिठाइयों की दुकानों पर मावा बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
होली आने से पहले ही हेल्थ की वाट लगाने के लिए सिंथेटिक मावा बाजार में उतरने लगा है। रंगों का त्योहार होने के कारण घरों में पकवान बनने की तैयारियां पूरे जोर-शोर पर हैं। इस मौके पर गुझिया व अधिकांश स्वीट्स में मावे का प्रयोग किया जाता है। मावे की इसी डिमांड को पूरा करने के लिए मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं और दूध के मावे की जगह लोगों को सिंथेटिक मावा (स्वीट प्वाइजन) दे देते हैं।