शासन ने गेहूं के प्रमाणित बीज के नाम पर घटिया बीज सप्लाई करने के मामले को गंभीरता से लिया है। उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम का दलपतपुर और सुल्तानपुर बीज विधायन संयंत्र बंद कर दिया। साथ ही बीज के लक्ष्य में भी कटौती कर दी है। इसकी वजह से रबी की फसल के दौरान किसानों को बीज किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम में कई साल से गेहूं का बीज तैयार करने में फर्जीवाड़ा हो रहा है। फर्जी तरीके से किसानों का पंजीकरण कर लिया गया है। ऐसे में न तो खेतों में बीज तैयार होता है और न ही किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम का लाभ मिल रहा है। बल्कि, इसका फायदा कर्मचारी और माफिया उठा रहे हैं।
बिलासपुर की एक बैंक में फर्जी तरीके से किसानों के खाते भी खुलवा कर चेकबुक जारी करा ली गई थीं। लिहाजा, किसानों को प्रमाणित बीज के नाम पर घटिया बीज सप्लाई किया जाता है। यह मामला करीब तीन साल से सुर्खियों में है।
बीज निगम का फर्जीवाड़ा शासन में पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम का दलपतपुर (मुरादाबाद) और स्वार का सुल्तानपुर सीड्स प्लांट बंद कर दिया गया है। किसानों के पंजीकरण और बीज के लक्ष्य में भी कटौती कर दी है। 2015-16 में 1.40 लाख क्विंटल गेहूं का बीज तैयार किया गया था। जबकि, 2016-17 में करीब 70 हजार क्विंटल बीज तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
बरेली में भी रामपुर के माफिया का जाल - बरेली मंडल में भी गेहूं का बीज तैयार करने में फर्जीवाड़ा हो रहा है। रामपुर के ही माफिया ने बरेली में भी अपने रिश्तेदारों का फर्जी पंजीकरण करा लिया है। इनमें मिलक और बिलासपुर के सबसे ज्यादा माफिया है। दड़े का सस्ता गेहूं खरीदकर उसकी पैकिंग ंकरा ली जाती है और बाद में वही गेहूं प्रमाणित बीज के नाम पर अधिक दामों में किसान को बेंच दिया जाता है। बरेली में भी किसानों के नाम पर फर्जी खाते खुलवाकर चेकबुक जारी करा ली हैं।
बीज विकास निगम के दो बीज विधायन संयंत्र बंद कर दिए हैं। बीज का लक्ष्य घटाने के साथ किसानों के पंजीकरण में भी कटौती की जाएगी। सिर्फ बिलासपुर के ही बीज विधायन संयंत्र में बीज की प्रोसेसिंग की जा रही है। - केपीएस गहलौत, परियोजना अधिकारी, बीज विकास निगम।