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मॉडल डिग्री कालेज के निर्माण में गड़बड़ी, ग्रिल और कमरों के हैंडलों की गुणवत्ता भी खराब

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रामपुर। टांडा के बन रहे डिग्री कालेज के निर्माण में धांधली की जा रही है। न तो मानक के अनुसार सामप्र का प्रयोग किया जा रहा है और न ही सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया है। आठ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहे इस कालेज के निर्माण गुणवत्ता की पोल तब खुली, जब खुद जिलाधिकारी औचक निरीक्षण कि लिए पहुंच गए। डीएम ने सख्त नाराजगी जताई। साथ ही लोक निर्माण विभाग को निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के सैंपल लेने एवं उनकी जांच कराने के आदेश दे दिए।
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तहसील टाण्डा के ग्राम लाम्बाखेड़ा में 8.27 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय मॉडल डिग्री कालेज का का निर्माण हो रहा है। 2016 से बन रहे कालेज का निर्माण सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) की र से कराया जा रहा है। शुक्रवार को जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह निर्माणाधीन कालेज के औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान डीएम को बिल्डिंग में लगाई गई ग्रिल सहित विभिन्न सामग्रियों में काफी कमियां मिलीं। निर्माण कार्य की अत्यन्त धीमी प्रगति एवं निरीक्षण के दौरान मिली विभिन्न कमियों पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए सम्बन्धित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निर्माणाधीन बिल्डिंग में प्रयुक्त निर्माण सामग्री की मानक के अनुरूप गुणवत्ता की लैब से टेस्टिंग कराने के सम्बन्ध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियन्ता संजीव कुमार को आदेश दिए। बिल्डिंग के कमरों में खिड़कियों के साथ लगाए गए हैंडल की गुणवत्ता खराब मिली। विद्यालय की चारदीवारी के निर्माण का कार्य भी पूर्ण नहीं हुआ है, जिस पर डीएम ने चारदीवारी के अन्तर्गत प्रस्तावित जमीन की पैमाइश कराकर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराते हुए डीपीआर के अनुसार चारदीवारी का निर्माण कार्य पूर्ण कराने के लिए निर्देशित किया। इसके बाद जिलाधिकारी औचक रूप से लाम्बाखेड़ा गांव पहुंचे, जहां मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या को देखकर तत्काल जिला पंचायतराज अधिकारी को निर्देशित किया कि एडीओ पंचायत के माध्यम से यथाशीघ्र जल निकासी के लिए नालियों का दुरूस्तीकरण और रास्ते को ठीक कराने के साथ-साथ गन्दे पानी की निकासी एवं कूड़े का उचित प्रबन्धन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित कराएं, ताकि आमजन को जलभराव के कारण उत्पन्न समस्याओं का सामना न करना पड़े। सिंचाई के लिए प्रयुक्त रजवाहे के सम्बन्ध में डीएम ने उपजिलाधिकारी एवं नहर विभाग के अधिकारियों को रजवाहे की पैमाइश कराते हुए उसे अतिक्रमण मुक्त करने के उपरान्त मनरेगा के तहत दुरूस्तीकरण के निर्देश दिए। वापसी के दौरान शहपुरा गांव में मुख्य मार्ग पर स्थित तालाब में गन्दगी एवं अतिक्रमण देखकर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी से कहा कि वे अभिलेखों के अनुसार जमीन की पैमाइश कराएं तथा अभिलेखों में यदि तालाब दर्ज है तो उस भूमि से अतिक्रमण हटाते हुए उसके जीर्णोंद्धार की कार्यवाही सुनिश्चित कराएं। ग्रामीण क्षेत्रों में लेखपालों द्वारा सार्वजनिक सम्पत्तियों के रखरखाव एवं उन्हें अतिक्रमण मुक्त बनाए जाने के सम्बन्ध में दिए गए निर्देशों का पालन न होने पर भी डीएम ने नाराजगी जताई तथा कहा कि लेखपाल और सचिव गांव की सार्वजनिक सम्पत्तियों के रखरखाव एवं सौन्दर्यीकरण के प्रति गम्भीरतापूर्वक कार्य करें।
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-प्रमोद कुमार लोधी
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