अध्यक्ष पद के लिए हुई राजनीतिक उठापटक के बीच अब तक कुल 16 बार जिला पंचायत की कमान आईएएस अफसरों के हाथ रही है। वर्ष 1961 से जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया जिले में शुरू हुई। 54 वर्ष पांच महीने के जिला पंचायत के सफर में अब तक 26 लोग जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे।
लाखन सिंह 27वें जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए हैं। जिले में गुरुवार को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव संपन्न हुआ। इस कुर्सी पर लाखन सिंह से पहले कुल 26 लोग बाठ चुके हैं। 16 बार प्रशासक के रूप में जिला पंचायत की कमान आईएएस अफसर के हाथ में रही।
रामपुर में दो अगस्त 1961 को आनंद कुमार जैन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। इसके बाद नौ दिन के लिए राधेलाल शर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष बने। राधेलाल शर्मा के बाद पहली बार जिला पंचायत की कमान आईएएस धर्मेंद्र मोहन सिंह के हाथ में आई।
धर्मेंद्र मोहन सिंह के बाद अब तक अनादि नाथ सहगल, राजेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार सब्बरवाल, उषा चितरथ, जनार्दन दास शाह, रामचंद्र शर्मा, कुलदीप सैनी, रामकिशन सिंह, टी जार्ज जोसफ, अतुल कुमार गुप्ता, सुनंदा प्रसाद, राजेंद्र कुमार, शेखर अग्रवाल, सतीश कुमार और मोहम्मद मुस्तफा जैसे आईएएस अफसरों के हाथों में जिला पंचायत की कमान रही है।
आखिरी बार 9 अक्तूबर 2005 से 13 जनवरी 2006 तक जिला पंचायत की कमान आईएएस मोहम्मद मुस्तफा के हाथ रही। जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में सबसे कम कार्यकाल तक काम करने वाले अध्यक्ष राधेलाल शर्मा रहे। राधेलाल शर्मा 1 जुलाई 1963 से 9 जुलाई 1963 तक के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष रहे।
हालांकि इसके बाद 1963 में ही 20 सितंबर को राधेलाल शर्मा एक बार फिर जिपं अध्यक्ष बने और इस बार 23 मार्च 1970 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इसके बाद राधेलाल शर्मा ने तीसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी 9 नवंबर 1974 को संभाली और 11 अगस्त 1977 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहे।
राधेलाल शर्मा पहली बार भले ही सिर्फ नौ दिन के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष बने हों, लेकिन इसके बाद उन्होंने कुल मिलाकर करीब दस साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभाली।