रामपुर। उत्तराखंड में हो रही बारिश के बाद जिले की कोसी व रामगंगा का जलस्तर बढ़ गया है, जिसके बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिले के 12 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने के बाद प्रशासन ने यहां स्थापित 30 बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है। एडीएम वित्त व राजस्व ने भी कई गांवों का भ्रमण कर यहां अफसरों को सतर्क रहने को कहा है।
जिले में दो दिन से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। कल रात भी जिले में मूसलाधार बारिश हुई। रात भर रुक-रुक कर तेज बारिश होती रही। हालांकि दिन में बारिश नहीं हुई, लेकिन बारिश की संभावना अभी बनी हुई है।
बारिश की वजह से शहर के कई इलाकों की सड़कों पर पानी भर गया। वहीं, उत्तराखंड में रुक-रुक कर हो रही बारिश से कोसी व रामगंगा का जलस्तर बढ़ गया है। प्रशासनिक अफसरों के अनुसार कोसी व रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान से अभी डेढ़ मीटर नीचे है।
जिला आपदा विशेषज्ञ दीपक पाल के अनुसार जिला प्रदेश के 44 अतिसंवेदनशील बाढ़ जिलों में शामिल नहीं है, फिर भी एहतियात के तौर पर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। कोसी और रामगंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर निचले कृषि क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका रहती है, जिसके मद्देनजर 12 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है।
जिले में 30 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और राहत व बचाव कार्यों से जुड़े सभी पांच प्रकार के टेंडर पूरे कर लिए गए हैं। रामनगर बैराज और रामगंगा डैम के कंट्रोल रूम से लगातार समन्वय स्थापित है और उनके ग्रुपों से रियल टाइम जलस्तर का डेटा लिया जा रहा है। डीएम और एडीएम स्वयं संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं।
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एडीएम ने किया मौका मुआयना
रामपुर। अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व) आनंद कुमार सिंह ने शाहबाद के एसडीएम के साथ शाहबाद के ग्राम बैरूआ, चंदपुरा खर्दा का स्थलीय निरीक्षण किया और रामगंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण जलमग्न हुए क्षेत्रों एवं बाढ़ से प्रभावित मार्गों का जायजा लिया गया। भ्रमण के दौरान उन्होंने एसडीएम को निर्देशित किया कि लोक निर्माण विभाग से समन्वय स्थापित कर पुल का निर्माण किया जाए, ताकि रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से आने-जाने वाले लोगों को सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके। संवाद