स्वार। किसी ने ट्रैक्टर उपलब्ध कराया, किसी ने ट्रॉली लगाई तो कोई कुदाल लेकर खड़ा हुआ...और कुछ ही घंटों में दो किलोमीटर के जर्जर रास्ते को चकाचक कर दिया। कोसी नदी के खादर में दो किलोमीटर के इस रास्ते से जुड़े आधा दर्जन किसानों को अब अपनी फसल मंडी ले जाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
मुरादाबाद-बाजपुर मार्ग से मुंशीगंज के मझरा एवज होते हुए दो किलो मीटर यह रास्ता उत्तराखंड सीमा से सटे घोसीपुरा पट्टीकलां तक जाता है। यह रास्ता आवागमन के लिए उपयोग में इसलिए नहीं आता कि अधिकतर जगह रास्ता कच्चा, जगह-जगह गड्डे, कीचड़ और जलभराव से ग्रस्त है, लेकिन कृषि कार्य के लिए इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।
यह मार्ग आधा दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ता है और किसानों को गन्ना व धान की फसल शुगर मिल अथवा मंडी तक ले जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इससे चौहदहा, कुंदनपुर, जमना, जमनी, अलीगंज, फतेहगंज समेत कई गांव के किसान सीधे तौर पर जुड़े हैं।
इस खराब रास्ते की सूरत संवारने के लिए ग्रामीणों ने कारसेवा की। ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन की उदासीनता देखते हुए स्वयं कारसेवा करके रास्ते को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया। दिनभर की मेहनत के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से रास्ते को सुगम बना दिया। ग्रामीणों की इस कारसेवा ने क्षेत्र में मिसाल पेश की है।
इन ग्रामीणों ने की कारसेवा
इस कारसेवा अभियान का नेतृत्व संदीप सिंह रहे जिनके नेतृत्व में साहब सिंह, रसपाल, हैप्पी, बागा, बलवीर, दानिश, हरपाल, जतिन, गोपी, बाबा सोनी, चीनू परमार और गुफरान अली ग्रामीण शामिल रहे।