दिल्ली से चांद नजर आने की शरई शहादत मिलने के बाद अब ईद मिलादुन्नबी 12 दिसंबर को मनाई जाएगी। काजी-ए- शरआ ने इसका एलान कर दिया। तमाम तंजीमे भी जुलूसे मुहम्मदी की तैयारी में जुट गई हैं। मिस्र से भी उलमा तशरीफ लाएंगे।
इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक 12 रबी उल अव्वल हजरत मोहम्मद सल्लाहो अलैह वसल्लम की पैदाइश का दिन है। इस दिन आपकी पैदाइश की खुशी मनाई जाती है। काजी-ए- शरआ सैयद शाहिद अली रजवी ने बताया कि 29 का चांद कहीं नजर नहीं आया था और न ही कहीं से चांद दिखाई देने की शरई शहादत मिली थी। इसलिए 30 की रोयत का एतेबार करते हुए ईद मिलादुन्नबी 13 दिसंबर को मनाने का एलान किया गया था। लेकिन, अब दिल्ली से शरई शहादत मिल गई है।
काजी-ए- शरआ ने बताया कि काजी-ए-अहले सुन्नत दिल्ली मुफ्ती मोहम्मद मियां समर को अहमदाबाद से 29 का चांद नजर आने की शरई शहादत मिली। उनसे राबता होने के बाद शरई गवाह मौलाना हबीबुनन्नबी नूरी और मौलाना मिस्बाहुल इस्लाम को कल दिल्ली भेजा गया। काजी-ए- शरआ ने बताया कि रबी उलअव्वल की पहली तारीख एक दिसंबर को हुई। लिहाजा ईद मिलादुन्नबी अब 12 दिसंबर को मनाई जाएगी। वहीं तंजीमों ने जुलूसे मोहम्मदी की तैयारी शुरू कर दी है।
मिस्र से मौलाना फैजान रजा भी तशरीफ ला रहे हैं। मौलाना 15 जलसों को खिताब करेंगे। पुराना गंज मंगल पैठ स्थित मजलिसे जमाले शाहजी के दफ्तर पर हुई मीटिंग में ईद मिलादुन्नबी धूमधाम से मनाने का फैसला लिया। उस दिन मस्जिद, खानकाहों, बाजार और मकानों को रोशनी से सजाने की अपील की।
इस मौके पर मौलाना मोहम्मद आरिफ जमाली, कारी महफूज हुसैन शेरी जमाली, नूर अहमद, हाफिज महफूज हुसैन, महमूद हुसैन शेरी जमाली, मसरूर हुसैन, मोहम्मद फैज शेरी, मोहम्मद मोहसिन, हाजी मेहंदी हसन भी थे।