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पहली बार लोकसभा पहुंचे घनश्याम, वर्षों पुराना सपना हुआ साकार

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पहली बार लोकसभा पहुंचे घनश्याम, वर्षों पुराना सपना हुआ साकार
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- दो बार एमएलसी रह चुके हैं, दो बार लड़ चुके हैं लोकसभा का चुनाव
- 1999 और 2009 में बसपा के टिकट पर लड़े थे चुनाव, नहीं मिली थी कामयाबी
फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल करने वाले भाजपा के घनश्याम सिंह लोधी पहली बार संसद पहुंचे हैं। हालांकि, संसद पहुंचने का उनका सपना वर्षों पुराना है। उन्होंने इससे पहले बसपा के टिकट पर दो बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा था। वह दो बार सपा से एमएलसी रह चुके हैं। अब लंबे सियासी सफर के बाद उन्हें लोकसभा उपचुनाव में जीत मिली है, जिससे उनका लोकसभा पहुंचने का सपना साकार हो गया है।
घनश्याम सिंह लोधी ने अपनी राजनीति की शुरुआत भाजपा से ही की थी। वह जिला संगठन में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। इसके साथ ही करीब 40 साल तक गांव की प्रधानी पर भी उनके परिवार का कब्जा रहा। वर्तमान में भी उनके भतीजे की पत्नी ग्राम प्रधान हैं। लेकिन उनका सपना बड़ा था। अपने सपने को साकार करने के लिए घनश्याम सिंह लोधी 1999 में बसपा में शामिल हो गए और लोकसभा का चुनाव लड़ा था। नवाब खानदान का रसूख था। ऐसे में उनकी जीत आसान नहीं थी। उन्हें तब महज 15740 वोट ही मिल सके थे और वह चुनाव बुरी तरह हार गए थे।
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इसके बाद उन्होंने बसपा से भी नाता तोड़ लिया और कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली जनक्रांति पार्टी में शामिल हो गए। सियासी सफर में घनश्याम सिंह लोधी को कामयाबी तब मिली, जब कल्याण सिंह के समर्थन से सपा की सरकार बनी। तब रामपुर-बरेली स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की सीट जनक्रांति पार्टी के खाते में चली गई थी और सपा से घनश्याम सिंह लोधी उम्मीदवार बने। यह चुनाव वह जीत गए और पहली बार एमएलसी चुने गए।
लोकसभा पहुंचने की चाहत में वह एक बार फिर बसपा में चले गए और उन्हें 2009 में टिकट भी मिल गया लेकिन यह चुनाव आसान नहीं था। हालांकि, उन्हें तब भाजपा प्रत्याशी रहे व वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से अधिक कुल 95132 मत प्राप्त हुए थे। जीत सपा से जयाप्रदा को मिली थी। इसके कुछ समय बाद ही लोधी फिर से सपा में शामिल हो गए और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें रामपुर-बरेली स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र से टिकट मिल गया था। सपा नेता आजम खां से नजदीकियां होने की वजह से उनका टिकट भी हेलीकॉप्टर से आया था। जिसके बाद वह दूसरी बार एमएलसी बने।
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इस बार लोधी विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में शामिल हो गए थे। उनकी मंशा तीसरी बार एमएलसी बनने की थी, लेकिन उन्हें एमएलसी के लिए टिकट नहीं मिला। इस बीच आजम खां के विधायक निर्वाचित होते ही लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सीट रिक्त हो गई। चुनाव आयोग ने उपचुनाव का एलान कर दिया, तो घनश्याम सिंह लोधी पर भरोसा जताते हुए भाजपा ने उन्हें टिकट दिया। भाजपा के भरोसे पर वह खरे उतरे और रविवार को नतीजों की घोषणा के बीच उनकी जीत का परिणाम सामने आया। इसके साथ ही उनका लोकसभा तक पहुंचने का पुराना सपना साकार हो गया।
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