रामपुर। स्वार तहसील क्षेत्र के रुस्तमनगर में घूघा नदी पर पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं के नदी पार करने की फोटो-वीडियो करने के मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद गांव में खलबली मच गई है।
आरोपियों में एक पूर्व प्रधान, उनका बेटा और आजाद समाज पार्टी के तीन पदाधिकारी शामिल हैं। नामजद लोगों में गिरफ्तारी को लेकर चिंता बनी हुई है और उनके घरों से हटे होने की बात सामने आ रही है।
आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह के अनुसार, नामजद सुनील कुमार पार्टी के स्वार विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष, गौतम उपाध्यक्ष और शिवम मीडिया प्रभारी हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रशासन को कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझना चाहिए। वह अपने क्षेत्र में नदी पर पुल बनवाना चाहते हैं, ताकि छात्र-छात्राओं व अन्य लोगों को आवागमन में आसानी हो सके। नासमझी के कारण ऐसा हो गया होगा। क्योंकि जो पक्का रास्ता है, वह काफी घुमावदार और लंबा है।
वहीं, शिवम का कहना है कि एसडीएम ने मंगलवार को आने का वादा किया था, जिससे हम संतुष्ट थे, लेकिन फिर भी हमारे साथियों पर कार्रवाई क्यों की गई। ग्रामीण और छात्राएं पुल की समस्या के समाधान की मांग उठा रहे थे। ऐसे में रिपोर्ट दर्ज होने से मायूसी है।
वहीं, पूर्व प्रधान नूर हसन ने कहा कि वह हलका लेखपाल के कहने पर नायब तहसीलदार से मिलने मौके पर गए थे। वहां छात्राओं ने पुल निर्माण की मांग को लेकर ज्ञापन दिया था, जिसे उन्होंने और नायब तहसीलदार ने संयुक्त रूप से लिया था। उनका सवाल है कि जब वह अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद थे और छात्राओं का ज्ञापन लिया गया था तो उन्हें और उनके बेटे को आरोपी क्यों बना दिया गया।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद नामजद लोगों में खलबली मची हुई है। आरोपियों को गिरफ्तारी का डर सता रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ नामजद लोग फिलहाल अपने घरों से हटे हुए हैं। वहीं, पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि बीईओ की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी के बीच खड़ा किया गया और उन्हें दलदल व सुनसान रास्तों से नदी तक ले जाया गया। इसके बाद बच्चों की फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों के जरिए प्रसारित कर कथित घटना को सच्ची दिखाने और सनसनी फैलाने का प्रयास किया गया।
तहरीर में यह भी आरोप है कि नदी का जलस्तर अधिक होने के बावजूद बच्चों को बीच नदी में खड़ा करने से उनकी जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। रिपोर्ट में किसी दूसरे की जान को खतरे में डालने और सोशल मीडिया पर झूठी अफवाह फैलाने के आरोप की धाराएं लगाई गई हैं।