वासंतिक नवरात्र पर छठे दिन बुधवार को मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान भक्तों ने काले तिल से पूजन कर रात्रि जागरण मां से शक्ति का वर मांगा। साथ ही उन्होंने माता को फल-फूल, ध्वजा, नारियल, शृंगार का सामान, कपूर चढ़ा कर परिवार की कुशलता मांगीं। वहीं, मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं ने दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। मंदिरों में घंटों के टनकार और जयकारे से समूचा माहौल देवी मय हो गया। महिलाओं ने माता के छंद गाए।
नवरात्र पर भक्तों ने मां कालरात्रि का पूजन किया। मां कालरात्रि की आराधाना रात्रि में करने का विशेष फल प्राप्त होता है इसलिए भक्तों ने रात्रि जागरण कर मां की पूजा-अर्चना की। साथ ही तिल के तेल का दीपक भी जलाया। भक्तों ने घर पर पूूजा कर मंदिरों व देवी स्थान पर पहुंचकर मां को पुष्प, फल, मिष्ठान, लौंग, मेवा आदि अर्पित किए। इसके साथ ही कपूर से मां की आरती कर दुर्गा चालीसा के साथ मां काली की आरती का पाठ किया। दोपहर बाद मंदिरों में देवी भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया।
महिलाओं ने बुधवार को पिन्नी का आयोजन कर कन्याओं व सुहागन स्त्रियों के साथ संकटा माता की पूजा की। वहीं, बिलासपुर में श्रद्धालुओं ने कालरात्रि देवी की पूजा-अर्चना की। वहीं, महिलाओं ने मंदिरों व घरों में मैया के छंद गाए।