नोटबंदी से रामपुर का चावल कारोबार चौपट होने के कगार पर है। राइस मिलों से लेकर मंडियों तक में चावल यूं ही पड़ा है, लेकिन उसका खरीदार नहीं मिल रहा है। हर रोज चावल के कारोबार को एक करोड़ की चोट लग रही है। यानी दस दिन में करीब दस करोड़ की चोट लग चुकी है। कारोबारियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो चावल के कारोबार के और भी ज्यादा बुरे दिन आ जाएंगे।
जिले के टांडा, सैदनगर, केमरी, बिलासपुर क्षेत्र में चावल का बड़ा कारोबार है। जिले में दो सौ से ज्यादा राइस मिलें हैं। चावल का आयात देश के विभिन्न कोनों के अलावा विदेशों तक खूब होता है। जिले में दो सौ से ज्यादा राइस मिलें इस वक्त नोटबंदी का शिकार हैं। हालत लगातार खराब हो रही है। नोटबंदी का असर इस बात से साफ देखा जा सकता है कि राइस मिलों में कई टन चावल यूं ही पड़ा हुआ है।
मंडियों में किसान भी चावल को नहीं खरीद पा रहे हैं, जिसकी वजह से दिक्कत महसूस हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में पचास लाख से दो करोड़ का व्यवसाय हर रोज होता है, लेकिन दस दिन से यह कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
कारोबारियों की मानें तो हर रोज रामपुर की ढाई सौ से ज्यादा राइस मिलों को करीब एक करोड़ की चोट लग रही है। यानी दस दिन में करीब दस करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिसकी वजह से कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।