रामपुर रियासत के नवाबों के ताज आखिर इंग्लैंड के लंदन में नीलामी कंपनी क्रिस्टीज के पास कैसे पहुंच गए। नवाब परिवार खोजबीन में जुट गया है। स्टेट बैंक आफ इंडिया दिल्ली के लॉकर से कैसे ताज गायब हुए, यह बड़ा सवाल है। बिना बड़ी साजिश के यह नहीं हो सकता। नवाब परिवार के वारिस नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां कहते हैं कि निजी लड़ाई से ज्यादा देश की विरासत को संजोकर रखने का सवाल है। नावेद मियां ने मामले में गृहमंत्रालय के अफसरों की भूमिका को भी संदिग्ध बताया है।
रामपुर रियासत के वारिस नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां के अधिवक्ता के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराने के बाद ताजों की नीलामी तो क्रिस्टीज ने रोक दी है।
लेकिन राजशाही परिवार इस बात को लेकर माथापच्ची कर रहा है कि ताज लंदन तक कैसे पहुंचे। पारिवारिक सूत्रों की मानें तो अंतिम नवाब रजा अली खां के इंतकाल के बाद दोनों ताज और राजशाही हीरे-जवाहरात दिल्ली की स्टेट बैंक आफ इंडिया की शाखा के लाकर में रखवा दिए गए थे।
पारिवारिक विवाद होने के कारण इनके बारे में किसी ने कोई ज्यादा जानकारी भी नहीं हासिल की। विधायक नावेज मियां कहते हैं कि सोशल साइट पर नीलामी के विज्ञापन देखने के बाद पूरा राजशाही परिवार हतप्रभ रह गया है।
विरासती सामान को लेकर चिंतित है। स्टेट बैंक की किस शाखा में विरासती सामान रखा है, पूरे दस्तावेज तलाशे जा रहे हैं। नावेद मियां का आरोप है कि लॉकर से बेशकीमती ताजों का गायब होना बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। मामले का पता लगाने के लिए कानून का सहारा लिया जा रहा है।