अवैध वसूली और उत्पीड़न पर रविवार को पिपलिया गोपाल गांव के ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। इस दौरान उन्होंने गांव में कच्ची शराब बनाने की सूचना पर जांच के लिए पहुंची आबकारी और चड्ढा ग्रुप की टीम को दौड़ा दौड़ा कर पीटा। इससे मौके पर अफरातफरी मच गई। मामले में टीम के पांच लोग घायल हो गए।
वहीं, ग्रामीणों ने टीम के वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। समाचार लिखे जाने तक घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी। जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह सात बजे आबकारी विभाग और चड्ढा ग्रुप की टीम पिपलिया गोपाल गांव में पहुंची।
बताते हैं कि टीम ने लीलावती पत्नी स्वर्गीय नेतराम सैनी के घर पर कच्ची शराब की तलाश में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान टीम को कोई शराब नहीं मिली। इस बीच ग्रामीणों को चड्ढा ग्रुप और आबकारी टीम के गांव में होने की जानकारी मिली तो वे आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों ने लाठी डंडों के साथ टीम की तीनों गाड़ियों को घेर लिया।
इस बीच एक ग्रामीण ने मारपीट करने वाले आबकारी और चड्ढा ग्रुप टीम के लोगों को पहचानते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस पर भीड़ ने सभी की पिटाई करनी शुरू कर दी। आरोप है कि चड्ढा ग्रुप के जीप चालक ओमपाल ने गांव निवासी राजपाल सैनी और एक बालिका को जीप से कुचलने की कोशिश की।
इस पर ग्रामीणों ने पथराव करके उसे घायल कर दिया। मारपीट में पांच लोग जख्मी हो गया। बाद में ग्रामीणों ने टीम को गांव से खदेड़ दिया। इस दौरान चेकिंग टीम के वाहन भी क्षतिग्रस्त होना बताए गए हैं। टीम की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी गांव पहुंच गई। तब तक मामला शांत हो चुका था।
वहीं, ग्रामीणों ने पुलिस को टीम की अवैध वसूली और उत्पीड़न करने की बता बताई। कोतवाली प्रभारी जगदीश अरोरा ने बताया कि सूचना पर उन्होंने पुलिस गांव भेज दी थी, मगर कोई भी थाने रिपोर्ट लिखाने नहीं आया है। तहरीर आने पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, चड्ढा ग्रुप के स्थानीय इंचार्ज डिंपल ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज न कराने के मामले में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उनकी टीम में सात लोग जरूर गए थे। छापेमारी के दौरान ग्रामीणों का आरोप था कि आबकारी विभाग चड्ढा ग्रुप की टीम के कहने पर गांव के लोगों को फर्जी तरीके से खेतों में काम करने के दौरान भी पकड़कर जिला मुख्यालय ले जाते हैं।
वहां उनके साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया जाता है। बाद में रुपये लेकर छोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर को टीम ने गांव निवासी धर्मपाल व उसके पुत्र महीलाल को पकड़कर जमकर मारापीटा था। बाद में दस हजार रुपये लेकर छोड़ दिया था। उन्होंने अवैध रूप से लिए गए दस हजार रुपये की मांग भी की।