जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में सदस्य अधिकारियों पर बिफर गए। उनका कहना था कि अधिकारी न सदन की गरिमा को समझ रहे और न ही सदस्यों को तरजीह दे रहे हैं। गुस्साए सदस्यों ने परियोजना निदेशक को भी बोलने से रोक दिया। माहौल गरमाने पर एक अधिकारी को सदन में खड़े होकर माफी मांगनी पड़ी। सदस्य इतने में गुस्से में थे कि उन्होंने प्रस्तावों के अनुमोदन से इनकार कर दिया था। बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष के आग्रह पर माने।
जिला पंचायत सभागार में बोर्ड की बैठक शुरू होते ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह डायस पर पहुंच गए। कहने लगे कि अधिकारी न सदन की गरिमा को समझ रहे हैं और न ही सदस्यों को तरजीह दे रहे हैं। कहा कि पिछली बैठक में अधिकारियों से योजनाओं की सूची और मोबाइल नंबर मांगे थे। किसी भी अधिकारी ने योजनाओं की जानकारी नहीं दी। चंद्रपाल के समर्थन में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, छत्रपाल सिंह यादव, महासिंह राजपूत ने भी अधिकारियों पर आरोप लगाने शुरू कर दिए।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह ने तो जिला पंचायत अध्यक्ष को भी लापरवाह बता डाला। बाद में एक अधिकारी को सदन में खड़े होकर माफी मांगनी पड़ी। परियोजना निदेशक मनरेगा और इंदिरा आवासों की जानकारी देने लगे तो सदस्यों ने उन्हें भी नहीं बोलने दिया। कहा कि मनरेगा और इंदिरा आवासों में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। सदस्यों ने किसी भी प्रस्ताव का अनुुमोदन करने से साफ इनकार कर दिया। बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष लाखन सिंह को आग्रह करना पड़ा। अध्यक्ष के आग्रह पर बोर्ड ने सभी प्रस्तावों का अनुमोदन कर दिया। आखिर में जिला पंचायत अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि सदस्य जो भी समस्याएं उठाएंगे उनका शीघ्र निराकरण कराया जाएगा।