गन्ना मूल्य भुगतान समेत अन्य समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय आह्वान पर भाकियू कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। शहजादनगर बाईपास के पास हाईवे पर जाम लगा दिया। गुस्साए किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने अधिकारियों की एक नहीं सुनीं और पूरे दिन हाईवे पर डटे रहे।
किसानों का कहना था कि दोनों सरकार किसान विरोधी हैं। देर शाम किसानों ने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर जाम खोल दिया। राष्ट्रीय आह्वान पर किसान सोमवार को जिलाध्यक्ष गुरविंदर सिंह पन्नू के नेतृत्व में अंबेडकर पार्क में एकत्र हुए। इसके बाद शहजादनगर बाईपास पर पहुंचे। कुछ ही देर में किसानों की भीड़ जमा हो गई।
किसानों ने जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में सारे रास्ते बंद कर दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर जाम लगा दिया। संपर्क मार्गों पर भी ट्रैक्टर-ट्राली खड़ी कर दी। किसान केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वहीं धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में पुलिस और अधिकारी पहुंच गए। दोपहर तक किसानों की भीड़ जुट चुकी थी।
पुलिस ने वाहनों को गांवों के रास्तों से होकर गुजारना शुरू किया तो किसान वहां भी पहुंच गए। किसानों का कहना था भाजपा और सपा ने चुनाव के दौरान तमाम वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद अपने वादे भूल गई। केंद्र और प्रदेश सरकार की गलत नीति के कारण किसान आत्महत्या को मजबूर है।
चीनी मिलों ने न तो पिछला बकाया दिया और न ही इस साल का भुगतान कर रही हैं। प्रदेश सरकार ने गन्ने का मूल्य भी नहीं बढ़ाया है। किसानों को उनकी उपज का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। गेहूं और धान खरीद केंद्र सिर्फ कागजों में चलाए जाते हैं। केंद्रों पर बिचौलियों का ही गेहूं और धान तौला जाता है। ये स्थिति गन्ना क्रय केंद्रों की भी है।
हाईवे पर वाहनों की जब लंबी कतार लग गई तो नगर मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर भी धरना स्थल पर पहुंच गए। दोनों ने किसानों को जाम खोलने के लिए राजी करने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं मानें। उनका कहना था कि जब तक हाईकमान के आदेश नहीं होंगे आंदोलन जारी रहेगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष लाखन सिंह की कार भी जाम में फंस गई। पुलिस ने उनकी कार निकलवाने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने उनकी कार भी रोक ली। किसान जिला पंचायत अध्यक्ष से कहने लगे कि वो भी उनके साथ धरने पर बैठें। ये सुनकर जिला पंचायत अध्यक्ष वापस लौट गए।
किसान शाम करीब छह बजे तक धरने पर बैठ रहे। इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया। नगर मजिस्ट्रेट ने आश्वासन दिया कि उनकी जो भी मांगें हैं, उन्हें शासन तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद जिलाध्यक्ष ने धरना समाप्ति की घोषणा कर दी।