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बांग्लादेशी प्रकरण: चौबीस घंटे के बाद भी नहीं मिले वो साक्ष्य जिनके आधार पर जारी हुआ था जन्म प्रमाणपत्र

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शाहबाद (रामपुर)। शाहबाद और बरेली में फर्जी दस्तावेज बनवाकर रहने के आरोप में गिरफ्तार किए बांग्लादेशी झोलाछाप चिकित्सक के जन्म प्रमाणपत्र बनाने का कोई ठोस सबूत नगर पंचायत में 24 घंटे के बाद भी नहीं मिला सका है। साक्ष्य ढूंढने के लिए अब लिपिक ने एक दिन का अतिरिक्त समय मांगा है।
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भारत में अपनी नागरिकता छिपाकर और फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर रह रहे बांग्लादेशी देवाशीष को पुलिस ने दिसंबर 2021 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 2013 में बांग्लादेश से आकर देवाशीष शाहबाद में रहने लगा था। साथ ही बरेली के एक मोहल्ले में क्लीनिक चला था। इस बीच उसने बांग्लादेशी पासपोर्ट होने के साथ-साथ भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था। देवाशीष भारतीय पासपोर्ट से एक बार बांग्लादेश जा चुका था। दूसरी बार बांग्लादेश जाते समय देवाशीष के पासपोर्ट पर संदेह हुआ। इस पर गृह मंत्रालय से देवाशीष की जांच आ गई थी। इसके बाद पुलिस की जांच पड़ताल में बांग्लादेशी देवाशीष भारत में अपनी नागरिकता छिपाकर और फर्जी आईडी प्रमाण पत्रों के आधार पर रहता हुआ पाया गया था। तभी से पुलिस विभिन्न तथ्यों के आधार पर जांच पड़ताल शुरू कर दी थी। सोमवार को विवेचक आरके त्रिपाठी शाहबाद नगर पंचायत द्वारा सात जुलाई 2015 को जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्र के सिलसिले में और उसकी कुंडली खंगालने में पहुंच गए थे। पुलिस द्वारा जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में अभिलेख मांगे गए। इसमें नगर पंचायत कर्मचारियों के पसीने छूट गए। शाहबाद नगर पंचायत द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्र में पत्रांक संख्या 362 दर्ज की हुई है। जब अभिलेख देखे गए तो उसमें 363 पत्रांक संख्या अंकित की गई थी। साथ ही रजिस्टर के अंदर सफेदा लगाकर कुछ नंबरों को ऊपर नीचे भी किया गया था। पुलिस द्वारा अभिलेख देखने पर रजिस्टर के अंदर बांग्लादेशी देवाशीष के नाम के सामने वाला पूरा कॉलम खाली पाया गया, जबकि रजिस्टर में अन्य जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वालों के कॉलम में प्राप्तकर्ता और गवाह के पता और नाम अंकित किया हुआ था। उस दौरान नवागत अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने अभिलेखों को देखकर कर्मचारियों को फटकार लगाई। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी नगर पंचायत के कर्मचारी मंगलवार को जन्म प्रमाणपत्र जारी करने में प्रयोग किए गए साक्ष्यों को ढूंढते रहे। लेकिन, जन्म प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुआ है। उसका कोई साक्ष्य नहीं मिला। बांग्लादेशी के जन्म प्रमाणपत्र जारी करने में नगर पंचायत शाहबाद के कौन-कौन कर्मचारी संलिप्त हैं। अब सभी जांच के घेरे में हैं। लिपिक ने अधिशासी अधिकारी से साक्ष्य ढूंढने के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय मांग लिया है। फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के प्रकरण में पुलिस को शक की सुई कई जगह घूम रही है।
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जन्म प्रमाणपत्र जारी करने में किन साक्ष्यों का उपयोग किया गया है। उसकी फाइल ढूंढी जा रही है। लिपिक ने एक दिन का समय अतिरिक्त मांगा है। फिलहाल, लिपिक फाइल को ढूंढ रहे हैं। - शैलेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, शाहबाद।
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