सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश के बीच आपसी सुलह कराकर एक बार फिर सूबे के कद्दावर मंत्री आजम खां ने पार्टी के अंदर अपनी मजबूत स्थिति और अहमियत को एहसास करा दिया है। उनकी इस भूमिका से प्रदेश में रामपुर का कद और बढ़ गया है। वह इस विवाद से काफी दु:खी नजर आ रहे थे। उनके बयान भी दर्द भरे थे। सपा के संग्राम में सुलह होने के बाद जिले के सपाइयों में खुशी की लहर है।
नगर विकास मंत्री आजम खां के सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से बरसों पुराने रिश्ते हैं। दोनों के रिश्ते कितने गहरे हैं यह जग जाहिर है। टिकटों के वितरण को लेकर जिस तरह सपा में सियासी घमासान जिस तरह शांत हुआ इसके पीछे नगर विकास मंत्री आजम खां को श्रेय जाता है। सपा में मचे घमासान से नगर विकास मंत्री काफी दु:खी नजर आ रहे थे, लेकिन शुक्रवार की शाम को अचानक मुलायम सिंह यादव द्वारा अपने बेटे एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से बर्खास्त करने की घोषणा कर दी गई थी। इस घोषणा के बाद से भले ही प्रदेश भर में सियासी हलचल तेज हो गई हों, लेकिन रामपुर खमोश था और सपाई स्तब्ध थे। आनन-फानन में रात में ही नगर
विकास मंत्री सीधे लखनऊ कूच कर गए। लखनऊ में कैबिनेट मंत्री आजम खां ने पिता-पुत्र के बीच सुलह समझौते में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आजम ने इस दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और उनसे काफी देर तक बातचीत की। उन्होंने ही दोनों के बीच सुलह समझौता भी कराया। आजम की कोशिश रंग लाई और फिर चंद घंटे में ही अखिलेश और मुलायम के बीच समझौता हो गया और इसकी विधिवत घोषणा भी कर दी गई। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के अंदर कैबिनेट मंत्री आजम खां की अहमियत और बढ़ गई है। साथ ही रामपुर का कद भी और बढ़ा दिया है। आजम की इस भूमिका से स्थानीय सपाई फूले नहीं समा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण का पटापेक्ष कराने के लिए वे नगर विकास मंत्री आजम खां को श्रेय दे रहे हैं। फिलहाल सपा खेमें में अब राहत है।