सींगनखेड़ा स्थित सार्वजनिक संपत्ति की जमीन पर कब्जा कर उसे जौहर यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में शामिल करने के दो अलग-अलग मुकदमों में कोर्ट ने सांसद आजम खां और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम को जमानत दे दी है। इसके अलावा मिलक कोतवाली में लोकसभा चुनाव के समय आजम खां के खिलाफ दर्ज आचार संहिता के उल्लंघन के मुकदमे में भी आजम खां को कोर्ट से जमानत मिल गई है।
इसी वर्ष आजम खां के विरुद्ध अजीमनगर थाने में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। एक में सींगनखेड़ा की 0.143 हेक्टेयर शत्रु संपत्ति और दूसरे में 0.286 हेक्टेयर सार्वजनिक जमीन कब्जा कर जौहर यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में मिलाने के आरोप हैं। दोनों मुकदमों में उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम भी आरोपी बनाए गए थे। इन मुकदमों में दोनों ने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत की अर्जी लगाई थी।
मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) प्रमेंद्र कुमार की कोर्ट में अर्जी पर सुनवाई हुई। आजम खां के अधिवक्ता ने राजनीतिक द्वेष की भावना से मुकदमे दर्ज कराने का तर्क रखा। अभियोजन पक्ष ने कहा कि अभियुक्त द्वारा अन्य लोगों के साथ मिलकर सींगनखेड़ा स्थित सार्वजनिक संपत्ति की जमीन कब्जा कर यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में मिलाई गई है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों मुकदमों में सांसद आजम खां और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम की जमानत को मंजूरी दे दी।
इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खां के खिलाफ मिलक कोतवाली में दर्ज हुए आचार संहिता के उल्लंघन के केस में भी कोर्ट ने 21 नवंबर को आजम खां की जमानत को मंजूरी दे दी है।
फिलहाल नहीं हो सकेगी रिहाई
सांसद आजम खां पर 80 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। कई मुकदमों में उनकी पत्नी विधायक डॉ. तजीन फात्मा और पुत्र अब्दुल्ला आजम भी आरोपी हैं। तीनों ही सीतापुर की जेल में हैं। अधिवक्ता संदीप सक्सेना का कहना है कि अभी कई और मामलों में जमानत लंबित होने के कारण आजम खां रामपुर के इन मुकदमों में जमानत मंजूर होने के बाद भी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।