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सपा नेता आजम खां के करीबी यूसुफ मलिक का कोर्ट में आत्मसमर्पण, जमानत खारिज

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रामपुर। सपा नेता आजम खां के करीबी मुरादाबाद के यूसुफ मलिक ने पुलिस को चकमा देकर अपने अधिवक्ता के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उनके अधिवक्ता द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। कोर्ट ने जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी। वहीं, कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने यूसुफ मलिक को जेल भेज दिया है।
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24 नवंबर 2019 को आलियागंज के किसान बंदे अली ने अजीमनगर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि मुरादाबाद निवासी सपा नेता यूसुफ मलिक ने अपने कुछ अज्ञात साथियों के साथ मिलकर उन्हें बंधक बना लिया और जान से मारने की नियत से जानलेवा हमला किया गया। साथ ही जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी, जिसके बाद यूसुफ मलिक के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
सोमवार को यूसुफ मलिक ने पुलिस को चकमा देते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शमीम अहमद अंसारी की कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसके बाद उनके अधिवक्ता द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया, जिस पर सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी हरेंद्र कुमार द्वारा जमानत का विरोध किया गया। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को झूठा फंसाने की दलील दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करते आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया।
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गौरतलब है कि युसूफ मलिक के खिलाफ के खिलाफ मुरादाबाद में भी 11 मामले दर्ज हैं। जिसमें हाल ही में अपर नगर आयुक्त मुरादाबाद को धमकी देने का भी मामला है।
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