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मनुष्य की चेतना को जागृत करना है शिक्षा का उद्देश्य

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रामपुर। भारत सरकार द्वारा मनाए जा रहे दस दिवसीय शिक्षक पर्व कार्यक्रम के नौवें दिन हुई बेवीनार में महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने स्टिमुलेटिंग इंडियन नॉलेज सिस्टम, आर्ट एंड कल्चर विषय पर पर विभिन्न शिक्षाविदों के अनुभवों एवं विचारों को ऑनलाइन सुना। शिक्षाविदों के विचारों को जीवन में आत्मसार करने का आह्वान किया।
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गुरुवार को हुई बेवीनार में प्रोफेसर सरोज शर्मा ने प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक विरासतों, ज्ञान-विज्ञान में प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान विज्ञान को वर्तमान शिक्षा पद्धति में समाहित करने की आवश्यकता के बारे में बताया। प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्रा ने भारतीय दर्शन एवं अध्यात्म के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य की चेतना को जाग्रत करना है ताकि वह आत्मज्ञान कर पूर्णत: को जान सके। डॉ.प्रवीण तिवारी ने भारतीय संस्कृति के मूल्यों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि हमारे समाज ने संघर्ष कर अपनी संस्कृति को संरक्षित रखा है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.माणिक रस्तोगी ने किया तथा डॉ.अरविंद कुमार ने सभी प्राध्यापकों का आभार व्यक्त किया। वहीं दूसरी और कालेज में एनएसएस और क्रीड़ा परिषद के तत्वावधान आयुष विभाग के डॉक्टरों और योग प्रशिक्षकों के सहयोग से पोषण और योग के माध्यम से स्वास्थ्य को कैसे बेहतर रखें विषय पर शििविर का आयोजन किया गया। लोगों को पोषण और योग की जानकारी और प्रशिक्षण दिया। प्राचार्य डॉ पी. के वार्ष्णेय द्वारा फीता काटकर शिविर का विधिवत उद्घाटन किया गया। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों की टीम द्वारा छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों का स्वास्थ्य परीक्षण कर औषधियों का निशुल्क वितरण किया गया। महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में महिला योग गुरु द्वारा महिला प्राध्यापकों एवं छात्राओं के लिए योग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर डॉ विनीता सिंह, डॉक्टर अरशद रिजवी, डॉक्टर मुजाहिद अली, डॉ. बीके चौधरी, डॉ. विनय शर्मा, डॉ. मोहम्मद नासिर, डॉक्टर ब्रह्म सिंह, डॉ. बीके राय, डॉ. निधि गुप्ता एवं अन्य प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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