13 साल से रिश्वत का आरोप झेल रहे बर्खास्त सिपाही को बरेली की कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया। कोर्ट के फैसले के बाद अब बर्खास्त सिपाही पुलिस अफसरों के खिलाफ मानवाधिकार आयोग की शरण लेगा। इसके लिए उसने तैयारी शुरू कर दी है।
रामपुर पुलिस में तैनात रहे सिपाही मोहम्मद रफी के खिलाफ सात सितंबर 2003 को सिविल लाइंस थाने में रिश्वत लेने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एंटी करप्शन की टीम ने इस मामले में सिपाही को गिरफ्तार कर बरेली जेल भेज दिया था। बाद में पुलिस ने मामले की चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की थी।
बरेली की कोर्ट में 13 साल तक इस मुकदमे में सुनवाई चली और फिर बरेली की कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बर्खास्त सिपाही मोहम्मद रफी को बाइज्जत बरी कर दिया। 13 साल तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष कोई भी पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर सका। इस मामले पर बर्खास्त सिपाही ने पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार आयोग की शरण लेने की बात कही है।
आरोप है कि पुलिस ने उनको झूठा फंसाया था। अदालत से उन्हें इंसाफ मिला है। पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ वह मानवाधिकार आयोग में वाद दायर करेंगे और क्षतिपूर्ति की भी मांग करेंगे।