शाहबाद। क्षेत्र के रम्पुरा गांव निवासी विमला (58) को पहले बुखार आया और फिर बुधवार को उनकी सांस उखड़नी शुरू हो गईं। घबराए परिजनों के पास सरकारी एंबुलेंस को बुलाने की मोहलत तक नहीं थी। ऐसे में परिजन विमला को एक ई-रिक्शा में ही लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए। परिजनों ने तुरंत ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से विमला को देखने की गुहार लगाई, डॉक्टर उसको देखने भी पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी सांसों की डोर टूट चुकी थी। मायूस परिजन निराश हालत में ई-रिक्शा पर ही विमला के शव को लेकर वापस घर चले गए।
ऐसे हालात गांवों में इन दिनों आम हो गए हैं। क्षेत्र के तमाम गांवों में ऐसे ही ग्रामीणों को पहले बुखार आ रहा है और उसके बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने के बाद मौत हो रही है। हालांकि इन मौतों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं हो रही, लेकिन इसके बावजूद इस प्रकार की मौतें ग्रामीणों में दहशत का पर्याय बन गई हैं।
विमला के परिजनों के अनुसार, उन्हें मधुमेह की बीमारी भी थी और पिछले दो दिन से लगातार बुखार आ रहा था। जिस पर उन्होंने गांव के ही एक मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिला दी थी। लेकिन मंगलवार को उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, बुधवार दोपहर को अचानक से सांस की समस्या बढ़ गई। आनन फानन में परिजन उन्हें ई रिक्शा में बैठाकर सीएचसी पहुंचे। सीएचसी पहुंचने पर डॉक्टर ने ई-रिक्शा में ही उनकी नब्ज टटोली, तब तक विमला की सांसों की डोर टूट चुकी थी।
चिकित्सक ने विमला को मृत घोषित कर दिया। परिजन वहीं से ई-रिक्शा में शव लेकर घर लौट गए। इसी दौरान एक नगर निवासी राजू की हालत भी बेहद गंभीर बनी हुई थी, और इन्हें भी सांस लेने में समस्या हो रही थी। उसे भी डॉक्टरों ने आनन-फानन में जौहर अस्पताल रेफर किया।
महिला पहले से बीमार चल रही थी। परिजन जब तक उसे लेकर सीएचसी पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। एक अन्य मरीज को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, उसे जौहर मेडिकल कॉलेज के एल-1 सेंटर भेज दिया गया है।
डॉ. केके चहल, सीएचसी चिकित्सक