सपा सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले जौहर ट्रस्ट को वर्ष 2005 में सरकार ने जौहर यूनिवर्सिटी के लिए 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी थी। भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पूर्व क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना द्वारा जमीन की खरीद के समय तय शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत करने के बाद मामले में तूल पकड़ा और कार्रवाई आगे बढ़ती गई।
इस शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही बताते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंपी थी। इस पर डीएम कोर्ट में इस मामले में वाद दर्ज हुआ था, जिसकी सुनवाई एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में चली। 16 जनवरी 2021 को एडीएम (प्रशासन) जगदंबा प्रसाद गुप्ता की कोर्ट ने जौहर यूनिवर्सिटी की 12.5 एकड़ जमीन को छोड़कर 70.005 हेक्टेयर जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था।
एडीएम कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। छह सितंबर को हाईकोर्ट ने जौहर ट्रस्ट की याचिका को खारिज करते हुए अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।