रामपुर। राज्य वित्त और 13 वें वित्त में करोड़ों रुपये के घपले की आशंका है। अधिकारी और कर्मचारी पैसे का हिसाब नहीं दे रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी की भी भूमिका संदिग्ध है। मुख्य विकास अधिकारी ने दो साल का रिकार्ड तलब किया है। साथ ही डीपीआरओ को चेतावनी जारी की गई है।
वर्ष 2011-12 और 2012-13 में राज्य वित्त, 12 वें और 13 वें आयोग से गांवों के विकास को करोड़ों रुपये मिल चुके हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने सारा पैसा खर्च करना दर्शा दिया। गड़बड़ी के कुछ मामले पकड़ में आए तो मुख्य विकास अधिकारी कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी से रिकार्ड मांगा। लेकिन, डीपीआरओ खर्च का लेखा-जोखा मुहैया नहीं करा सके। सीडीओ ने कुछ दिन पहले जिला पंचायत राज अधिकारी की भी भूमिका को संदिग्ध मानते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी जारी की। उसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई। सीडीओ ने बताया कि डीपीआरओ ने कुछ गांवों के कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र मुहैया कराकर पूरा रिकार्ड देने में असमर्थता जता दी। सीडीओ ने बताया कि दो साल में करीब पचास करोड़ रुपये मिल चुके हैं। लेकिन, डीपीआरओ पूरा रिकार्ड मुहैया नहीं करा पाए। लिहाजा रिकार्ड मुहैया कराने की जिम्मेदारी अब खंड विकास अधिकारियों को सौंपी गई है। इसके लिए 14 दिसंबर तक का समय दिया गया। उसके बाद संबधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।