रामपुर। लिकर किंग पोंटी चड्ढा के रसूख के आगे नियम-कायदे सब कुछ बौने साबित हो जाते थे। इसकी मिसाल है कि रामपुर में एक ही दिन में एक ही पते पर एक, दो नहीं बल्कि चड्ढा फैमिली के पांच सदस्यों को सात शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए गए। इसमें पोंटी के नाम पर दो लाइसेंस जारी किए गए थे। मजे की बात यह है कि लाइसेंस जारी करते समय यह भी नहीं देखा गया कि जिसको लाइसेंस जारी किया जा रहा है वह हथियार चलाने लायक है भी या नहीं।
चड्ढा बंधुओं की हत्या के बाद तमाम ऐसेे राज खुलकर आ रहे हैं जो चौंकाने वाले हैं। इसके साथ ही खुल रही है सरकारी मशीनरी की पोल। रसूख के बलबूते शासन की नीतियां बदलवाने का दम रखने वाले चड्ढा के आगे प्रशासनिक अफसर नतमस्तक हो जाया करते थे। नियम कायदों के साथ किस तरह खेला जाता है इसका खुलासा अब हो रहा है। लिकर किंग कोे 27 जून 1991 में प्रशासन की ओर से दो शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए थे। इसी तारीख में पोंटी के भाई राजेंद्र सिंह उर्फ राजू को एक, हरदीप सिंह को दो लाइसेंस जारी किए गए थे। तीनों भाइयों को लाइसेंस बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के नगलिया खुर्द गांव पते से जारी किए गए थे। मजे की बात यह है कि इसी पते पर पोंटी के चचेरे भाई गुरजीत सिंह चड्ढा पुत्र हरभजन सिंह और ममेरे भाई हरपाल सिंह पुत्र रघुवीर सिंह को भी लाइसेंस जारी किया गया। इन सभी को बिलासपुर क्षेत्र के नगलिया खुर्द गांव के पते से लाइसेंस जारी किए गए थे। मजे की बात यह है लाइसेंस जारी करने में नियम-कायदों की कोई परवाह तक नहीं की गई थी। पोंटी का एक हाथ कटा हुआ था, जबकि दूसरे हाथ की सिर्फ दो अंगुलियां ही सलामत थी। लाइसेंस जारी करते समय यह तक नहीं देखा गया कि जिसको लाइसेंस दिया जा रहा है वह हथियार चलाने लायक है या नहीं। और तो और लाइसेंस का नवीनीकरण में भी अफसर नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे।