रामपुर। जिले में संचालित तीन गो-आश्रय स्थलों में 486 गोवंशीय पशु संरक्षित हैं। अब इन पशुओं के टीकाकरण एवं टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। इनमें 85 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण एवं 76 प्रतिशत पशुओं की टैगिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
गोवंश संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। इसके लिए विभाग द्वारा अनेक कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू कराया जा रहा है। जनपद में वर्तमान में सरकारी संसाधनों के तहत दो गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जिसमें वृहद गो संरक्षण केंद्र किरा में 416 गोवंश और अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल घारमपुर में 55 गोवंश हैं। नगर क्षेत्र मसवासी में नगर पंचायत के संसाधनों से संचालित गो आश्रय स्थल में 15 गोवंश संरक्षित हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद माहौर ने बताया कि सरकारी खर्च पर संचालित गो आश्रय स्थल में गोवंश के स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिगत शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सख्ती से अनुपालन कराया जा रहा है। प्रत्येक गोवंश पर भूसा, हरा चारा और चोकर के लिए प्रतिदिन खर्च के लिए 30 रुपये निर्धारित हैं, जिसके अनुसार पशुओं की बेहतर देखभाल और चारे के पर्याप्त प्रबंध कराए जा रहे हैं। वृहद गो संरक्षण केंद्र किरा में संरक्षित पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता सहज तरीके से सुनिश्चित कराने के दृष्टिकोण से स्थानीय स्तर पर पांच एकड़ भूमि पर हरा चारा भी उगाया जा रहा है, ताकि पशुओं को हरे चारे की आपूर्ति में किसी प्रकार की समस्या न आने पाए। उन्होंने बताया कि आश्रय स्थल में पशुओं का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है, ताकि समय से पशुओं को उचित उपचार मिल सके। किसानों के गो वंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं को भी सरकार की नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत आच्छादित किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार जनपद में 459702 गो वंश एवं भैंस वंश पशु चिह्नित हैं। इन सभी पशुओं को गला घोटू से बचाव हेतु टीका से आच्छादित करने की कार्यवाही वृहद स्तर पर की जा रही है। जनपद के लगभग 85 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। शेष में टीकाकरण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं की नि:शुल्क टैगिंग भी कराई जा रही है और टैगिंग का कार्य 76 प्रतिशत पूरा भी कर लिया गया है। टैगिंग का मुख्य उद्देश्य यह है कि इससे विभाग को पशुओं में टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान की मॉनिटरिंग में सहूलियत मिलेगी।