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Rampur News: एक माह में 3.5 लाख मच्छरों पर खर्च फिर भी फैल रहा डेंगू

Wed, 19 Nov 2025 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
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रामपुर शहर में कुछ इस तरह पटी पड़ी नाले में गंदगी। संवाद
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रामपुर। अक्तूबर माह में नगर पालिका के फागिंग अभियान में पालिका ने कागजों में खूब फागिंग कराई। प्रतिदिन 150 लीटर डीजल खर्च होता, जिससे एक माह में 3:50 लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन जब डेंगू के डंक ने कहर बरपाया तो हकीकत सामने आई। पालिका प्रशासन फाॅगिंग का दावा कर रहा है तो वार्डों के लोग इन्कार कर रहे हैं।
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शहर में 43 वार्ड हैं और इन वार्डों में रहने वाली आबादी करीब चार लाख की है। मौसम बदलाव होते ही मच्छर हावी हो गए और कई इलाकों में डेंगू के मरीज भी निकलना शुरू हो गए। इस बीच जब पालिका पर फाॅगिंग का दवाब बढ़ा तो उसने एक महीने का रोस्टर बनाकर चंद इलाकों में फागिंग कराकर इतिश्री कर ली, जबकि अधिकांश मोहल्ले फाॅगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव से अछूते रह गए।



फाॅगिंग की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि कागजों में रोस्टर बना। 32 वार्डों के लोगों से बात की गई तो बताया कि इस साल न तो फाॅगिंग कराई गई और न ही छिड़काव कराया गया। शहर के अजीतपुर, मस्जिद काले खां, शाहबाद गेट, गांधी समाधि, सीआरपीएफ गेट के पीछे और पुरानी कॉलोनी में देखने को मिला कि यहां पर फाॅगिंग नहीं कराई गई थी और नालियां गंदगी से अटी थीं। इन इलाकों के लोगों का कहना था कि पिछले एक साल से फाॅगिंग नहीं कराई गई है।
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रोजाना खर्च 150 लीटर डीजल

रामपुर। कर्मचारी बताते हैं कि अक्तूबर महीने के रोस्टर के अनुसार रोजाना बड़ी मशीनों में 150 लीटर डीजल खर्च हुआ है। इसमें 19 लीटर डीजल में एक लीटर मैलेथियान मिलाई गई थी और 39 लीटर डीजल में एक लीटर डेल्टामाइसीन मिलाकर छिड़काव कराया गया है।





अब तक 33 डेंगू, 52 मलेरिया के मरीज



रामपुर। जिले की अगर बात करें तो सभी जगह मच्छरों का प्रकोप अधिक रहा है। आंकड़े बताते है कि अब तक 33 डेंगू मरीज निकल चुके हैं और 52 मलेरिया के मरीज निकल चुके हैं। बावजूद इसके निकायों में भी फागिंग की समस्या देखने को मिल रही है।

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सात मशीनें और 16 छोटी मशीनें

रामपुर। अधिकारी बताते है कि पालिका के पास सात मशीनें बड़ी हैं और 16 छोटी मशीनें रखी हैं। अक्तूबर महीने में हुई फागिंग और छिड़काव में चार दो बड़ी और दो छोटी मशीनें लगाई गई थी, जिससे 150 लीटर प्रतिदिन डीजल की खपत से फागिंंग कराई गई है।



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बोले लोग...



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मेरे घर की तरफ शाम होते ही इतने मच्छर आ जाते हैं कि रातभर सोने नहीं देते। माॅर्टीन और ओडोमास भी बेअसर रहते हैं। खिड़कियों की जालियों से भी मच्छर अंदर घुस जाते हैं। -विजय, कृष्णा मंदिर

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फागिंग हमारी तरफ बिल्कुल नहीं हुई है। नगर पालिका की टीम मेरी तरफ एक बार भी नहीं आई है। अभी इस साल के भीतर यहां पर फागिंग नहीं हुई है। अब मच्छरों का प्रकोप छाया हुआ है। -कमल सिंह, गांधी समाधि



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मेरे इलाके में नालियों से मच्छर पनप रहे हैं। नाली चोक होने से यहां पर गंदगी जम जाती है, जिसके चलते मच्छर काफी अधिक बढ़ जाते है। फागिंग की गाड़ी एक बार भी इधर नहीं पहुंची है। -किशन पाल, शाहबाद गेट





गेट के पीछे वाले इलाके की गलियां काफी तंग है और यहां पर नालियों से कचरा भी नहीं निकल पाता है, जिससे यहां पर मच्छर पनपते रहते है और घरों के अंदर घुस रहे हैं। -विशाल सैनी, सीआरपीएफ गेट के पीछे





पालिका ने अब तक यहां पर फागिंग नहीं कराई है। फागिंग के नाम पर चंद इलाकों में गाड़ी घुमाई है। इसके अलावा एक कॉलोनी में गाड़ी नहीं गई। जब चंद इलाकों में हुई तो जानकारी लगी, लेकिन यहां नहीं आई। -रहमत मियां, पुरानी कॉलोनी





पालिका ने मच्छरों को खत्म करने के लिए कुछ नहीं किया। पिछली साल फिर भी हमारे इलाके में धुएं वाली गाड़ी पहुंची थीं, इस बार तो गाड़ी देखने को ही नहीं मिली। -सलमान, मस्जिद काले खां





हमारे वार्ड में एक बार भी गाड़ी नहीं पहुंची है। फागिंग होती तो इस समय भी मच्छर नहीं लगते। वार्ड को कोई भी सुविधा सही से नहीं मिल पा रही है। फागिंग और छिड़काव न होने से जगह-जगह मरीज निकल रहे हैं। -हारून खां, मस्जिद काले खां

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वर्जन-

मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से पहले हमने सभी इलाकों में फागिंग कराई थी। यदि कुछ इलाके रह गए हैं तो उनमें भी फागिंग करा दी जाएगी। इसके अलावा डेंगू जिन इलाकों में निकला है, वहां पर भी टीम ने फागिंग कराई है। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, रामपुर
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