निदेशक तकनीक के सामने उठा कमीशनखोरी का मुद्दा
रामपुर। निविदा कर्मियों के मानदेय से कमीशन मांगने का मामला निदेशक तकनीक के सामने भी उठाया गया। निविदा कर्मियों ने ठेकेदारों पर मनमानी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद निदेशक ने सरलोक कंपनी के ठेकेदार को तलब कर लिया। साथ ही कमीशन मांगने पर टेंडर निरस्त करने की चेतावनी दी।
बिजली विभाग में स्टाप की कमी है। लिहाजा, लाइनमैन से लेकर सब स्टेशन ऑपरेटर तक का कामकाज निविदा कर्मियों के सहारे लिया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से टेंडर निकाले जाते हैं, जिसके बाद ठेकेदार कर्मचारियों की तैनाती करते हैं। इसके लिए निविदा कर्मी की योग्यता के अनुरूप हर माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन निविदा कर्मियों के मानदेय का भुगतान करने के लिए ठेकेदार हर माह कमीशन की मांग करते हैं। रामपुर में तो प्रतिमाह हर निविदा कर्मी से पांच सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक कमीशन लिया जा रहा है। निविदा कर्मी इसका लगातार विरोध भी कर रहे हैं और उच्चाधिकारियों से शिकायत भी कर रहे हैं। किन्तु, इसके बाद भी ठेकेदारों की मनमानी का सिलसिला जारी है। इस पर पिछले दिनों मुरादाबाद में निदेशक तकनीक की मीटिंग में भी यह मुद्दा उठाया गया। निविदा कर्मी धीरेन्द्र मोहन सक्सेना ने निदेशक के समक्ष कमीशनखोरी और ठेकेदारों की मनमानी का मुद्दा से उठाया। इस पर निदेशक तकनीक राजकुमार अग्रवाल ने सरलोक कंपनी के लोकपाल को तलब कर लिया। उन्होंने ठेकेदार की जमकर क्लास लगाई। साथ ही ठेकेदार को यह चेतावनी भी दी कि दोबारा कमीशनखोरी का मामला सामने आया तो सीधे टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। निविदा कर्मी धीरेन्द्र मोहन सक्सेना ने बताया कि ठेकेदार निविदा कर्मियों का शोषण कर रहे हैं। इसी वजह से यह मुद्दा उठाया गया था। अन्य जिलों के निविदा कर्मियों ने भी ठेकेदारों की मनमानी सामने रखी थी, जिस पर निदेशक ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया।