एसडीएम के औचक निरीक्षण ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बाल विकास परियोजना कार्यालय की पोल खोल कर रख दी। निरीक्षण के दौरान सीएचसी से चिकित्साधीक्षक समेत पांच डाक्टर गैरहाजिर मिले। पांच अन्य कर्मचारियों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं थी। मरीज दवा और इलाज के लिए खड़े थे। वहीं, बाल विकास परियोजना कार्यालय के निरीक्षण के दौरान वहां सिर्फ एक चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी मौजूद था।
डीपीओ और मुख्य सेविकाओं का कोई अता-पता नहीं था। सरकारी दफ्तरों में नियमों और कायदों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अधिकारी और कर्मचारी बिना बताए ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हैं। उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं हैं। इसका खुलासा शनिवार को एसडीएम अली हसन कर्नी के निरीक्षण के दौरान हुआ। मिलक सीएचसी पर ने शनिवार एक बजे एसडीएम पहुंचे।
मरीज दवा और इलाज के लिए भटकते मिले। मरीजों ने एसडीएम से शिकायत की कि यहां कोई पर्चा बनाने वाला और दवा देने वाला भी नहीं है। एसडीएम ने हाजिरी रजिस्टर का निरीक्षण किया। केंद्र अधीक्षक डा. सत्यपाल सिंह बिना अनुमति के गैरहाजिर मिले। डा. मजहबी एक बजे ही अस्पताल छोड़कर चली गईं थीं। डा. निहाल सिंह, डा. एचएस राणा, नेत्र चिकित्सक डा. कुलदीप कुमार, स्टाफ नर्स निहारिका यादव, मंजू रानी, प्रीति, मारग्रेट भी गैरहाजिर मिलीं।
नेत्र परीक्षण अधिकारी डा. कुलदीप कुमार ने 26 मार्च को ही अपने अवकाश के लिए पत्र दिया था, इसे चिकित्साधीक्षक ने 26 मार्च को ही स्वीकृत किया था, जबकि वो स्वयं गैरहाजिर थे। एसडीएम के सवालों का ड्यूटी पर मिले डाक्टर कोई जलाव नहीं दे पाए। उपजिलाधिकारी ने शनिवार के लिए सीएचसी के इंचार्ज को लेकर जानकारी मांगी।
डा. असलम ने बताया कि उनके पास लिखित चार्ज नहीं है। इसके बाद एसडीएम ने बाल विकास परियोजना अधिकारी के दफ्तर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चतुर्थ श्रेणी के एक कर्मचारी को छोड़कर परियोजनाधिकारी और मुख्य सेविकाएं गैरहाजिर मिलीं।