सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त होने के बाद सोमवार को जिले के शिक्षामित्रों का गुस्सा भड़क गया। स्कूलों में शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर विकास भवन में धरना-प्रदर्शन कर हक की आवाज बुलंद की।
सभी ने एक स्वर से कहा कि हमारी मांगे पूरी हों, चाहे जो मजबूरी हो। शिक्षामित्रों के कार्य बहिष्कार से जिले के तमाम स्कूलों में पढ़ाई ठप रही। धरने में शिक्षामित्रों ने ऐलान किया कि जब तक उन्हें हक नहीं मिलेगा, वे शिक्षण कार्य नहीं करेंगे।
धरनास्थल पर आयोजित सभा में आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने कहा कि शिक्षामित्र हार न मानें। अंतिम समय तक लड़ाई लड़ी जाएगी और हक हासिल किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि तमाम ऐसे शिक्षामित्र हैं जिनकी उम्र काफी हो चुकी है। अब उन्हें कहीं दूसरी नौकरी भी नहीं मिल सकती है। जिला महामंत्री पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि पूरी उम्र स्कूलों में शिक्षण कार्य में गुजार दी।
अब मेहनत का मूल्य मिला तो उसे भी छीन लिया गया। नगर अध्यक्ष कृष्णचंद्र ने कहा कि शिक्षामित्रों के हक लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ी जाएगी। धरने के दौरान विकास भवन परिसर में शिक्षामित्रों ने जमकर नारेबाजी थी।
शिक्षामित्रों के बढ़ते आक्रोश को देख अधिकारियों ने पीएसी भी बुला ली थी। धरने में शिक्षामित्रों ने ऐलान किया कि जब तक उन्हें हक नहीं मिलेगा, वे शिक्षण कार्य नहीं करेंगे।
धरने में लक्ष्मी प्रताप सिंह, रामविष्णु मौर्या, अनिल मौर्या, संत प्रसाद, सदाशिव, राजबहादुर, सुमन, प्रीती, मिनाक्षी, रचना, संगीता, किरन, बीरेंद्र आदि मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट को मांगों का ज्ञापन सौंपा।
वहीं शिक्षामित्रों के कार्य बहिष्कार व धरना-प्रदर्शन से जिले के तमाम स्कूलों में सोमवार को पढ़ाई ठप रही।