रायबरेली। सिंचाई विभाग ने टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों की सफाई का काम पूरा कर लिया है। इस बार नहरों में कटान न हो, इसके लिए पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए कर्मचारियों की टीम गठित की गई है।
नहरों में पानी पहुंचाने के लिए 400 क्यूसेक पानी की डिमांड की गई है। अगले दो-तीन दिनों में पानी पहुंचने की उम्मीद है। टीम के सदस्य किसानों को कुलाबे से ही पानी लगाने के लिए प्रेरित करेंगे।
यदि कोई बीच नहर में कटिंग करता है, तो उस किसान पर कार्रवाई की जाएगी। इस बार करीब 1900 किलोमीटर नहरों की सफाई में करीब सात करोड़ 65 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
जिले में सिंचाई विभाग के आठ खंडों की नहरों का जाल फैला है। इसमें सबसे ज्यादा नहरें सिंचाई खंड दक्षिणी की है। सिंचाई खंड दक्षिणी के अभियंताओं का दावा है कि नहरों की सफाई काम लगभग पूरा कर लिया गया है।
पानी छोड़ने के लिए डिमांउ भी भेजी जा चुकी है। किसी नहर में अधिक पानी न जाए, इसके लिए 50 टीमें लगाई है। नहरों में पानी छोड़ने के बाद उसकी निगरानी करेंगे। यदि ज्यादा पानी पहुंच रहा तो तत्काल नहर को बंद कराया जाएगा, ताकि नहर उफनाकर न कटने पाए।
माइनर की नाली पटी, कटान होना तय
सिंचाई विभाग हर बार माइनरों में कटान न हो, इसके लिए टीम गठित करता है, लेकिन हर बार माइनरों में कटान होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है यह है कि हर माइनर के टेल के बाद छोटी नाली होती है। यह नाली किसी तालाब या ड्रेन में जाकर मिली होती है, लेकिन यह नालियां केवल कागजों पर ही रह गई हैं।
हकीकत में नालियां गायब हो गई हैं। इनकी सफाई या मरम्मत के न तो कोई बजट मिलता है न ही विभाग की ओर से कोई रखरखाव होता है। यही वजह है कि माइनरों में अधिक पानी होने पर कटान होती है या फिर उफना जाती है।
यदि नाली बनी हो तो कटान की नौबत ही न आए। क्योंकि नहर में बढ़ा हुआ पानी पानी इन नालियों से निकल जाए। पिछले साल खरीब और रबी सीजन में करीब 15 जगह माइनरों में कटान हुआ है।
सबसे ज्यादा कटान सिंचाई खंड 45 की नहरों में हुआ। जिले भर में नहर कटान से करीब पांच हजार बीघे फसल जलमग्न हुई। खास बाद यह है कि खराब हुई फसल का मुआवजा तक किसानों को नहीं मिलता है।
डीह और छतोह क्षेत्र के किसान होंगे बेहाल
परशदेपुर। छतोह और डीह ब्लॉक क्षेत्र के किसान इस बार फिर पानी के संकट से जूझेगे। क्योंकि डीह रजबहा की सफाई में महज खानापूरी की जा रही है। यह रजबहा सिंचाई खंड 45 के अंतर्गत आता है। इससे निकली बिजौली, घाटमपुर, निनानवां, पदुमपुर, पूरे बंधन, जगतपुर माइनर निकली है। जब डीह रजबहे में ही ठीक से पानी नहीं पहुंचेगा तो माइनरों का क्या हाल होगा।