रायबरेली। रबी की फसल की बोवाई में खाद का संकट किसानों के लिए मुसीबत बनी है। एक बोरी डीएपी के लिए किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। खाद की कमी दूर करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने 2600 मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड की है। इसी सप्ताह खाद आने का दावा किया जा रहा है। इस समय गेहूं फसल की बोआई रही है। इसमें किसानों को डीएपी की जरूरत है। जिला मुख्यालय हो या फिर साधन सहकारी समितियां खाद की कमी बनी है। किसानों को मायूस होकर घरों को लौटना पड़ता है। जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश ने बताया कि खाद की कमी दूर करने के लिए 2600 मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड की गई है। इसी सप्ताह खाद मिलने की उम्मीद है। ऐसा होने पर कुछ हद तक जिले में डीएपी खाद का संकट दूर हो जाएगा।
निजी क्षेत्र को आई एक हजार मीट्रिक टन खाद
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि निजी क्षेत्र के लिए एक हजार मीट्रिक टन डीएपी जिला मुख्यालय आई है। यह खाद निजी दुकानदारों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि निजी दुकानदारों को निर्देश दिए गए हैं कि तय रेट पर खाद की बिक्री करेंगे। यदि कहीं से मनमाने रेट पर खाद बिक्री करने की शिकायत मिलती है तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ सीधे तौर पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
डीएपी नहीं तो एनपीके खाद का करें प्रयोग
जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि देखने में आ रहा है कि जिला मुख्यालय या फिर साधन सहकारी समितियों में एनपीके उपलब्ध है। बावजूद इसके एनपीके न लेकर किसान डीएपी खरीदना चाहते हैं। उनका कहना है कि डीएपी का काम एनपीके करती है। एनपीके लेकर किसान गेहूं की फसल की बोवाई कर सकते हैं। एनपीके से भी गेहूं की बोवाई करने पर फसल अच्छी होती है।