ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से रायबरेली का अपना अलग महत्व है। ये पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निर्वाचन क्षेत्र रहा है। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी यहीं से सांसद हैं। देश की आजादी में भी रायबरेली के क्रांतिकारियों की भूमिका काफी अहम रही है। गंगा किनारे यहां डलमऊ आकर्षण का केंद्र है। 1986 में स्थापित इंदिरा उद्यान, समसपुर पक्षी अभ्यारण्य और बेहटा का पुल पर्यटन का मुख्य केंद्र है।
छह विधानसभा क्षेत्र
जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। 2017 चुनाव में इनमें तीन पर भाजपा के प्रत्याशियों को जीत मिली थी। दो पर कांग्रेस और एक सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी। हालांकि अभी कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस की एक विधायक ने पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। वहीं, कोरोना से भाजपा के एक विधायक का निधन हो चुका है।
चुनावी माहौल बनने लगा
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर यहां का सियासी माहौल गर्म होने लगा है। सवाल उठने लगे हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में यहां कितना विकास हुआ? क्या आम लोग सरकार के कामकाज से खुश हैं? युवा, महिलाएं और आम जनता मौजूदा सरकार के बारे में क्या सोचती है? राजनीतिक दलों के नेताओं का क्या मानना है? वह किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' सोमवार को रायबरेली में होगा।
आप भी 'अमर उजाला' के इस मंच से जुड़ सकते हैं। इसके जरिए आप अपने क्षेत्र, शहर, राज्य और देश के हर मुद्दे को उठा पाएंगे। आप बता पाएंगे कि आने वाले चुनाव में नेताओं और राजनीतिक दलों से आपको क्या उम्मीदें हैं? किन मसलों को लेकर आप मतदान करेंगे और नेताओं से आप क्या चाहते हैं?
कब और कहां होंगे कार्यक्रम
1. सुबह 9 बजे
चाय पर चर्चा
स्थान : जेल गार्डन रोड स्थित टी-स्टॉल
2. दोपहर 12 बजे
आधी आबादी से चर्चा
स्थान : स्काउट भवन परिसर
3. दोपहर 2 बजे
युवाओं से चर्चा
स्थान : एफडी कॉलेज परिसर
4. शाम 4 बजे
राजनीतिक दलों से चर्चा
स्थान : सुपर मार्केट
अब तक 35 जिलों में हो चुका है कार्यक्रम
अब तक पश्चिमी यूपी, ब्रज, अवध और पूर्वांचल के 35 जिलों में 'सत्ता का संग्राम' आयोजित हो चुका है। 11 नवंबर को गाजियाबाद से चला रथ मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ होते हुए एक दिसंबर को बुलंदशहर पहुंचा था। इसके बाद हमारा चुनावी रथ अवध और फिर पूर्वांचल में दाखिल हुआ। लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी होते हुए रायबरेली पहुंचेगा।
‘सत्ता का संग्राम’ में क्या होगा खास?
चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ के तहत अमर उजाला हर वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचेगा। चाय पर चर्चा के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं से संवाद होगा। राजनीतिक हस्तियों से सीधे सवाल पूछे जाएंगे। अमर उजाला आपको एक मंच दे रहा है, जहां आप बातों को रख सकेंगे, ताकि जब राजनीतिक हस्तियां चुनावी रैलियां करने आएं तो उन्हें आपसे जुड़े जमीनी मुद्दे भी याद रहें।
विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था
‘सत्ता का संग्राम’ से जुड़े कार्यक्रमों में जमीनी स्तर पर हिस्सा लेने वाले दर्शकों और श्रोताओं के लिए विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है।
इस विशेष कवरेज को आप कहां देख सकेंगे
- अमर उजाला अखबार और amarujala.com पर आपको कार्यक्रम स्थल की जानकारी मिलेगी।
- ‘सत्ता का संग्राम’ से जुड़ी व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में पढ़ सकेंगे।
- amarujala.com पर आप कार्यक्रमों को लाइव देख सकेंगे।
- सभी कार्यक्रम अमर उजाला डिजिटल के फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल पर देखे जा सकेंगे।
- इन सभी कार्यक्रमों के जरिए दर्ज होने वाली जनता की आवाज विशेष रूप से अमर उजाला के पॉडकास्ट ‘आवाज’ पर भी उपलब्ध रहेगी।