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यूक्रेन बनाते थे हमें ढाल, तीन बार एयर स्ट्राइक करती थी रूसी सेना

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ऊंचाहार (रायबरेली)। ...सुमी में हालात बहुत भयावह थे। दिन में तीन बार रूसी सेना एअर स्ट्राइक करती थी। आसपास की इमारतों को ध्वस्त होते देख लगता था कि अब अपने वतन वापस नहीं जा पाऊंगा। ...हर पल मौत सिर पर मंडरा रही थी। ... बमबारी होने से पानी की सप्लाई व बिजली आपूर्ति बंद हो गई थी।
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खाने का सामान खत्म हो गया था। एटीएम ब्लॉक कर दिए गए थे। कुछ छात्रों ने बाहर निकलने की कोशिश की तो यूक्रेनी सैनिकों ने रोक लिया। कहा कि जब तक तुम लोग रहोगे हम सुरक्षित रहेंगे।
इस दौरान आसपास के गांव वाले मसीहा बनकर आए। बंकरों में छुपे लोगों को प्रतिदिन मुफ्त में अंडे व ब्रेड देते थे, जिसे खाकर हम अपनी भूख मिटाते थे। कोटरा बहादुरगंज गांव निवासी मेडिकल छात्र अखिलेश कुमार मौर्य शुक्रवार रात सकुशल अपने घर पहुंचे।
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अखिलेश बोले आज ऐसा लग रहा है कि जैसे पुनर्जन्म हुआ है। युद्ध का भयावह मंजर सुनकर परिवारीजनों और लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
अखिलेश ने बताया कि हम लोग सुमी स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते थे। हम लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार ने ट्रेन बुक की थी। ट्रेन में इंट्री मिलते ही पोलैंड का वीजा मिला और हम लोग वहां पहुंचे। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले अफगानिस्तान, पाकिस्तान व अफ्रीका के छात्र भी थे।
हम लोगों ने उनको भी साथ निकालने के लिए कांट्रैक्टर से गुजारिश की, जिसके बाद उन लोगों ने हाथ में तिरंगा लिया और वाहन में सवार हुए। उन लोगों को पोलैंड बार्डर पर अलग किया गया। पोलैंड बार्डर पर एक महिला मंत्री मिलीं। उन्होंने हौसलाअफजाई की। कहा तुम लोग बहादुर हो।
युद्ध में सब ने साहस दिखाया। अब चिंता की बात नहीं है। सबको फ्री में सुरक्षित घर पहुंचाएंगे। इसके पहले पौलैंड पहुंचे तो लगा कि अब सुरक्षित हूं। हम सब खुश थे। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं। उनकी विश्व में फैली कीर्ति व धमक की वजह से हम लोग सुरक्षित लौट पाए हैं।
मेडिकल छात्र ने बताया कि यूक्रेन में इस समय हर तरफ तबाही का मंजर है। लोग जान बचाकर भाग रहे हैं। कोई किसी की मदद करने को तैयार नहीं है।
देखते ही देखते बमबारी से इमारतें धराशायी हो रही हैं। जिधर नजर उठती है, उधर मलबे दिखते हैं। वहां का दहशत भरा नजारा देखकर लगता नहीं था कि अब अपनों से मुलाकात हो पाएगी।
हमने इस तरह के दहशत का मंजर कभी नहीं देखा। ऊपर वाले से यही कहूंगा कि इस तरह की मुसीबत कभी न आए। बेटे के सकुशल पहुंचने पर परिवारीजनों के खुशी के आंसू झलक पड़े। कहा कि सरकार की मदद से बेटा घर सकुशल पहुंच गया।
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