गदागंज (रायबरेली)। गांव के विकास का आईना सड़कें होती हैं, लेकिन वर्तमान में इनकी हालत बहुत दयनीय हो गई है। बारिश होते ही सड़कों की सूरत बिगड़ने लगी है। लोग खस्ताहाल सड़कों से आवागमन करने को मजबूर हैं। यह हाल तब है जब शासन सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए गंभीर है। सारी हकीकत जानने के बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
केस - एक
गदागंज चौराहे से जलालपुर धई, भुरकुशापुर, प्रयागपुर, नारायण पुर बन्ना व गंगा घाट को जाने वाली सड़क पर गड्ढों की भरमार है। ग्रामीण संजय, करन बहादुर, हरिकेश सिंह, नागेंद्र सिंह, अभय वाजपेयी, आशीष सिंह, राजन, पंकज दुबे व सर्वेश मौर्य का कहना है कि इस रोड से प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोगाें का आवागमन रहता है। सड़क पर पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।
केस - दो
सरदारगंज तिराहे से एक रोड डलमऊ कोल्ड स्टोर के निकट प्रयागराज-उन्नाव मार्ग को जोड़ती है। इसकी लंबाई करीब 20 किमी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस रोड से 20 हजार लोग प्रतिदिन आते-जाते हैं। यह सड़क 80 गांवों को जोड़ती है। ग्रामीण धर्मेंद्र त्रिवेदी, रामजी मिश्र, गोविंद तिवारी, राम त्रिवेदी, पप्पू त्रिवेदी, दिनेश यादव, गुड्डू वर्मा व बिंदादीन का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगे डंपरों की वजह से पूरा मार्ग खस्ताहाल हो गया है। वाहन तो दूर पैदल चलना तक दूभर हो गया है।
केस - तीन
गोंडा गांव को जाने वाली सड़क कई वर्षों से खराब है। यह रोड आठ गांवाें को जोड़ती है। ग्रामीण शिव शंकर त्रिवेदी, भोला शंकर त्रिवेदी, शिवमख्न, गंगा मिश्र, मौसम, आदित्य मिश्र, रामप्रसाद, माता प्रसाद यादव ने बताया कि बारिश के कारण जगह-जगह कटान हो गया हैं। हालत इतनी खराब है कि इस मार्ग पर कब हादसा हो जाए, कुछ कहा जा नहीं सकता। गड्ढों में हिचकोले खाकर दोपहिया वाहन पलट जाते हैं।
खराब सड़कों को किया जाएगा चिह्नत
एक्सईएन संजीव कुमारी का कहना है कि जर्जर सड़के के बारे में उनको जानकारी नही है। इनको चिह्नित कर बनवाया जाएगा।