रायबरेली। कोटेदारों की मनमानी के चक्कर में जिला पूर्ति अधिकारी और सदर के आपूर्ति निरीक्षक निलंबित कर दिए गए हैं। आरोप है कि लापरवाही के कारण राशनकार्ड के मुखिया की मौत के बाद परिवार के लोगों को राशन देने के साथ ही तमाम अपात्रों को भी राशन वितरण किया गया। मामले में पहले ही राही ब्लॉक के परमानपुर की कोटे की दुकान को निलंबित किया गया है और अमावां ब्लॉक के ताजपुर के कोटेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया गया है। शासन स्तर से कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है। अधिकारियों को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
संयुक्त निदेशक ने मई महीने में राही ब्लॉक के परमानपुर और अमावां ब्लॉक के ताजपुर की कोटे की दुकानों का निरीक्षण किया था। इसमें पाया गया कि गांवों में मृतकों के कार्डों पर उनके परिवार के लोगों को प्रॉक्सी के माध्यम से राशन दिया गया है। जांच में यह भी पाया गया था कि कोटेदारों ने तमाम अपात्रों को भी कार्ड देकर राशन दिया। लॉकडाउन के दौरान राशन वितरण में लापरवाही की गई।
मामले में परमानपुर की कोटे की दुकान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि आपूर्ति निरीक्षक ने अमावां ब्लॉक के ताजपुर के कोटेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आयुक्त मनीष चौहान ने दोनों गांवों के कोटेदारों की मनमानी के मामलों में लापरवाही का दोषी पाए जाने पर जिला पूर्ति अधिकारी केएन सिंह और सदर के आपूर्ति निरीक्षक सुखदेव को निलंबित करके उपायुक्त (खाद्य) बरेली को अंतिम जांच सौंपी गई है। दोनों अधिकारियों को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
कार्रवाई को लेकर जितने मुंह उतनी बातें..
यूं तो जिले में पूर्व में बड़े-बड़े कारनामे पकड़ में आए थे, लेकिन एक छोटे से मामले में जिला पूर्ति अधिकारी और आपूर्ति निरीक्षक के निलंबन के मामले में जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। लोगों में चर्चा है कि वर्तमान समय में आपूर्ति विभाग में अधिकारियों के तबादले पर रोक लगी हुई है।
ऐसी स्थिति में किसी को कुर्सी पर बैठाने के लिए कार्रवाई हुई है। यही नहीं लोगों में चर्चा है कि प्रवासी श्रमिकों को अस्थायी राशनकार्ड जारी करने के लिए शासन से दी गई 30377 प्रवासी श्रमिकों की सूची की जांच भी डीएसओ ने करवा दी। जांच में मात्र 12104 प्रवासी ऐसे मिले जिन्हें राशनकार्ड जारी किया जा सकता है। इसी तरह अन्य चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं।