18-रायबेरली में मंगलवार को सरकारी बसें न होने से परशदेपुर रोड पर इस तरह प्राइवेट बस में भरकर जाने क?
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रायबरेली। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में रोडवेज बसों को लगा देने से जिले में आवागमन की व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई। खुद के साथ अपनों बच्चों को जान जोखिम में डालकर लोग प्राइवेट वाहनों (डग्गामार) से सफर करते नजर आए। हाल ये रहा कि मंगलवार के मैजिक और टेंपो से लोग घरों, दफ्तरों और गंतव्य स्थान जाने को मजबूर दिखे। इन वाहनों पर लोगों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया, लेकिन घर पहुंचने की चाहत ने लोगों को परेशानी को भुला दिया। प्राइवेट वाहनों के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
रायबरेली डिपो की 75 बसें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में लगाई गई थी। मुसाफिरों को लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ समेत अन्य जनपदों में जाने के लिए मशक्कत का सामना करना पड़ा। जिले के पॉकेट रूटों पर चलने वाले लोगों को परेशानी से दो चार होना पड़ा। सलोन रोड, परशदेपुर रोड, ऊंचाहार, जायस, सरेनी, भोजपुर रोड पर गंतव्य स्थान जाने के लिए बैठे यात्रियों को मैजिक, टेंपो और प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा। खास बात ये रही कि इन रूटों पर चलने वाले अधिकतर वाहन खटारा हैं। बावजूद इसके मुनाफा कमाने के चक्कर में चालक लोगों को वाहनों में ठूंस-ठूंसकर भरा। जिंदगी दांव पर लगाकर लोग सफर करते रहे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
ट्रिप बढ़ाने का दावा पूरी तरह से फेल
बस स्टेशन पर मंगलवार को यात्रियों में अफरातफरी रही। कोई बस पहुंचती तो उस पर सवार होने को धक्कामुक्की होती रही। कुछ ही देर में बस फुल हो जाती। रायबरेली डिपो के अधिकारियों की ओर से बसों के ट्रिप बढ़ाने का दावा किया गया, लेकिन यह पूरी तरह से फेल साबित हुआ। यात्रियों को समस्या से राहत नहीं मिली।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बसों के लगा दिए जाने से दूसरे दिन भी यात्रियों को गंतव्य स्थान जाने में परेशानी हुई। हालांकि बसों के ट्रिप बढ़ाकर लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। बुधवार तक बसों के आने के बाद यात्रियों को फिर से आने जाने में सहूलियत मिलने लगेगी। - अक्षय कुमार, एआरएम