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Raebareli News: नियति और काल के फेर में चली गईं तीन जिंदगी, उजड़ गए परिवार

Fri, 27 Feb 2026 12:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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जगतपुर क्षेत्र के अलीगंज डिगवा गांव में मृतक आशुतोष मौर्या के रोते बिलखते परिजन। 
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रायबरेली। भदोखर क्षेत्र के लखनऊ प्रयागराज मार्ग पर ग्राम (मोहलिया) शीतल का पुरवा के निकट बुधवार की रात तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई थी। हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई थी। इस घटना ने तीन परिवारों को कभी न भूलने वाला दर्द दे दिया है। नियति और काल के फेर में तीन जिंदगियां चली गईं और पीछे बच्चों और परिवार की चीखें छूट गई हैं।पोस्टमार्टम के बाद तीनों युवकों के शव जब गांव पहुंचे तो बच्चों और परिवार के करुण क्रंदन ने हर किसी की आंख नम कर दी। तीनों शवों का अंतिम संस्कार गोकना घाट पर किया गया।
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जगतपुर के ग्राम दौलतपुर निवासी धनंजय सिंह बुधवार शाम को अपनी कार से दोस्त संदीप सिंह निवासी परहरी व आशुतोष मौर्य निवासी अलीगंज डिहवा के साथ रायबरेली शहर आए थे। असल में संदीप सिंह की बहन रोली का तिलक समारोह बृहस्पतिवार को था तो इस कारण तीनों दोस्त खरीदारी के लिए रायबरेली आए थे। वहां से वापस लौटते समय ग्राम मोहलिया के पास तेज रफ्तार कार अनियंत्रित हो गई और शारदा नहर पटरी को फांदते हुए नीम के पेड़ से टकरा गई थी। इसमें तीनों दोस्तों की मौत हो गई थी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों को सीएचसी जगतपुर पहुंचाया था,जहां चिकित्सकों ने तीनों युवकों को मृत बताया था। इसके बाद पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।बृहस्पतिवार सुबह तीनों शव पोस्टमार्टम के बाद गांव लौटे तो परिवार के लोग बिलख पड़े। अपनों के अंतिम दर्शन के लिए परिवार के साथ ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई हादसे को नियति का खेल मान रहा था।
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इनसेट
एक घंटे बाद संदीप का मिला शव
हादसा होने के पाद जीवन की आस में परिजन आशुतोष व धनंजय सिंह को सीएचसी ले गए थे। इस दौरान पता लगा कि संदीप भी कार में बैठे थे। इस पर पुलिस और परिवार के लोग रात में घटनास्थल पर पहुंचे तो छानबीन करने पर संदीप का शव झाड़ियों में मिला।
इनसेट
बहन का तिलक स्थगित, उजड़ गई कच्ची गृहस्थी
हादसे का शिकार हुए संदीप सिंह की बहन का तिलक बृहस्पतिवार को चढ़ना था। इस हादसे ने सारी खुशियां आंसुओं में बदल दी। रोली का तिलक समारोह स्थगित कर दिया गया है। तीनों युवक को के बच्चे छोटे हैं और अब उनकी पत्नी पर बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी आ गई है। परिवार के अनुसार धनंजय बर्जर पेंट में मार्केटिंग सीनियर सेल्स पद पर कार्यरत थे। मां शशि सिंह, भाई आदर्श सिंह, पत्नी प्रीति सिंह व दो वर्षीय बेटे अभ्यांश धनंजय की मौत से बिलख बिलख कर रोते दिखे।

इकलौता चिराग थे संदीप
मृत संदीप घर का इकलौता चिराग थे। इनका होटल पिछवारा चौराहे पर था। उसी का संचालन संदीप काफी दिनों से कर रहे थे। संदीप पर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। संदीप के पिता तेजभान सिंह सलोन थाने में होमगार्ड के पद पर कार्यरत हैं। वहीं पत्नी सोनम सिंह अपनी बेटी ग्रेसी (5) न जसिका (2) के सिर पर हाथ रखते हुए उनको शांत करने में लग रहीं। संदीप की दो बहने हैं। एक बहन का विवाह हो चुका है और रोली के तिलक की तैयारी घर में चल रही थी।

बहन को लगा है सदमा
भाई संदीप की मौत ने बहन रोली का हिलाकर रख दिया है। वह सुधबुध खो चुकी है। संदीप का शव जब गांव आया तो वह रोते हुए कह रही थी कि भैया मेरी खुशियों की तैयारी में लगे थे, पता नहीं किसकी नजर लग गई। मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी।
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पिता के शव देख बिलख पड़े बच्चे
आशुतोष मौर्य का पारी कस्बे में होटल चलाते थे। पिता चंद्रभान मौर्य किसान हैं। पत्नी नीलम, बेटा प्रसून (7), बेटी अनिका (3), तीन भाई और एक बहन का रो-रोकर हाल बेहाल है। पाप का शव जब बच्चों ने देखा तो वह बिलख पड़े। बच्चों को रोता देख गांव के लोगों को भी रोना आ गया। ग्रामीणों की जुबा पर एक ही बात थी कि एक पल में हंसता खेलता परिवार उजड़ गया।
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