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स्वास्थ्य महानिदेशक ने निरस्त किया 4.88 करोड़ से खरीद का टेंडर

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रायबरेली। जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रहीं डॉ. नीता साहू ने 4.88 करोड़ से खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया मनमर्जी तरीके से की।
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अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी की जांच में मानकों के विपरीत मिलने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है।
टेंडर प्रक्रिया निरस्त किए जाने के बाद मामले से जुड़े कई लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। अमर उजाला ने 29 जून के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
जिला अस्पताल में इलाज संबंधी उपकरणों, फर्नीचर व अन्य चिकित्सीय संसाधनों की खरीद के लिए 4.88 करोड़ की टेंडर प्रक्रिया की गई।
उन्नाव निवासी धीरेंद्र बहादुर सिंह ने राज्यमंत्री संसदीय कार्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण व मातृ एवं शिशु कल्याण से मामले की शिकायत की थी।
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राज्यमंत्री के आदेश पर स्वास्थ्य महानिदेशक ने मामले की जांच अपर निदेशक को दी थी। तीन दिन पहले अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी ने मामले की जांच जिला अस्पताल आकर की थी।
अपर निदेशक ने जांच में पाया कि सीएमएस ने मनमर्जी तरीके से जेम पोर्टल के मानकों को ताक पर रखकर टेंडर प्रक्रिया कराई थी। प्रक्रिया में मानकों का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने के साथ ही सीएमएस के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करके स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेज दिया था।
अपर निदेशक की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक वेदव्रत सिंह ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। पत्र आने के बाद जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया है।
अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी ने बताया कि जिला अस्पताल में 4.88 करोड़ से उपकरण व फर्नीचर खरीद की टेंडर प्रक्रिया पूरी करके महानिदेशक को रिपोर्ट भेजी थी।
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मामले में राज्यमंत्री के स्तर पर शिकायत की गई थी। जांच के बाद प्रक्रिया को निरस्त करने के साथ ही सीएमएस डॉ. नीता साहू पर कार्रवाई के लिए संस्तुति की थी। टेंडर प्रक्रिया में मानकों का पालन नहीं किया गया था।
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