ऊंचाहार (रायबरेली)। एक साल बाद फिर महत्वपूर्ण ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस पर हुए पथराव ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की नींद उड़ा दी है। घटना से आरपीएफ की सुरक्षा व्यवस्था और रेलवे की सतर्कता की पोल खुल गई है। घटना के बाद कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। सीसीटीवी फुटेज के इंतजार में आरपीएफ खाली हाथ बैठी है। पथराव किसने किया, इसका पता लगा पाने में आरपीएफ नाकाम है।
गोरखपुर और प्रयागराज के बीच दौड़ने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पर जिले में कई स्थानों पर पत्थर फेंके जाने की घटनाएं घट चुकी हैं। ऊंचाहार क्षेत्र की बात करें तो यहां दो बार घटनाएं हुईं, जिनमें पहली घटना करीब एक साल पहले अरखा व परियावां स्टेशनों बीच घटी थी। इस मामले में काफी समय बाद आरपीएफ ने दो सगे भाइयों समेत चार बच्चों को पकड़ा था। एक बार फिर बीते मंगलवार को देर शाम पत्थर फेंके जाने की घटना घटी तो आरपीएफ की नींद उड़ गई।
इस बार यह घटना प्रयागराज से गोरखपुर जा रही वंदे भारत पर ऊंचाहार स्टेशन एवं सवैया धनी रेलवे क्रासिंग के मध्य घटी। पत्थर फेंके जाने से सी-4 कोच के शीशे चटक गए। इससे यात्रियों में अफरातफरी मच गई। लोको पायलट की तहरीर के आधार पर आरपीएफ ने केस दर्ज कर जांच की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। घटनास्थल के आसपास आरपीएफ की टीम ने पूछताछ की, लेकिन पत्थर फेंकने वालों का पता नहीं लग सका है। छानबीन अभी चल रही है।
यात्रियों ने दो बच्चों को भागते हुए देखा
वंदे भारत एक्सप्रेस पर जैसे ही पत्थर लगे, उसी समय सी-4 कोच के यात्रियों ने बाहर की तरफ देखा। रेलवे सूत्रों की माने तो यात्रियों ने दो बच्चों को भागते हुए देखा। आरपीएफ पोस्ट ऊंचाहार के प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि घटना का पता चलते ही छानबीन कराई गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। जिन बच्चों के भागते हुए देखे जाने की बात कही जा रही है, उनकी पहचान करा रहे हैं। गोरखपुर कंट्रोल से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मंगाई गई है।